भारत में परिवार नियोजन की प्रगति और उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।

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आज कल संसार के सभी देशों में बढ़ती हुई जनसंख्या की कारगर रोकथाम हेतु परिवार नियोजन का कार्यक्रम अपनाया जाता है। भारत में परिवार नियोजन कार्यक्रम का श्रीगणेश सन् 1952 में हुआ, जिसका उद्देश्य जनसंख्या का नियंत्रण और परिवार कल्याण था। परिवार नियोजन कार्यक्रम में पहली योजना में मात्र 14.50 लाख रु. दूसरी योजना में 2.16 करोड़ रु. तीसरी में 24.9 करोड़ रु. चौथी में 278 करोड़ रु. पाँचवी में 491.8 करोड़ रु. छठवीं में 1,800 करोड़ रु., सातवीं में, 3,120 करोड़ रु. आठवीं में 6,500 करोड़ रु. व्यय किया गया। फरवरी 2000 में नई जनसंख्या नीति घोषित की गई। नई नीति के कार्यान्वयन हेतु प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय आयोग भी गठित किया गया। सन्तानोत्पत्ति की रोकथाम हेतु गर्भ निरोध और गर्भपात के उद्देश्य से विभिन्न साधनों को अपनाया जा रहा है, जिनमें गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन, स्त्रियों के लिए सूप और पुरुषों के लिए निरोध, करण, गर्भधारण से बचाव हेतु जेली, क्रीम, फेनिल गोलियाँ, परिवार नियोजन एवं यौन शिक्षा देने का कार्यक्रम चलाया गया। देश भर में लगभग दस हजार मान्यता प्राप्त गर्भ समापन केन्द्र भी कार्यरत है।

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परिवार नियोजन एवं कल्याण का संदेश नगरों और गाँवों में व्यापक जन-शिक्षण एवं प्रेरणात्मक आकर पर चल रहा है। स्कूल, कॉलेजों और प्रौढ़ शिक्षा के कार्यक्रमों में जनसंख्या शिक्षा को जोड़ दिया गया है। मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं को परिवार कल्याण कार्यक्रम का अभिन्न अंग बनाया गया है। सरकरी समितियों, श्रम संघों, पंचायतों और स्थानीय संगठनों से सहायता ली जा रही है। इस पर भी इस कार्यक्रम को अभी तक वांछित सफलता नहीं मिल पायी है।

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