बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने हेतु किये गये प्रयासों का वर्णन कीजिये।

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बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन – बालिका शिक्षा के सन्दर्भ में भावी समाज के निर्माण में निम्न बातों पर ध्यान देना आवश्यक होगा

  1. बालिकाओं एवं बालक विद्यालयों को समान सुविधाएँ देने का प्रयत्न करना चाहिए।
  2. महिला शिक्षा पर विशेष बल दिया जाना चाहिए।
  3. बालिका शिक्षा के प्रसार के लिए योग्य अध्यापिकाएँ, जो ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने की इच्छुक हों, अधिक संख्या में नियुक्त की जाएँ।
  4. लड़के तथा लड़कियों में चले आ रहे भेदभाव को समाप्त किया जाए।
  5. केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों को महिला शिक्षा के विभिन्न कार्यक्रमों हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

सन् 1970-71 से 1975-76 की पंचवर्षीय योजना से लेकर नवम् पंचवर्षीय योजना तक 14 वर्ष की आयु वर्ग की बालिकाओं की निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा पर बहुत जोर दिया गया तथा राज्य सरकारों को भी इस दिशा में समुचित कदम उठाने के लिए कहा गया, जिसके फलस्वरूप सभी राज्यों ने 6 से 11 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं के लिए निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था की और इस क्षेत्र में पर्याप्त सफलता भी मिली।

सन् 1975-76 से 1980-81 योजनाकाल में बालिकाओं को निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था करने तथा उनके नामांकन में पर्याप्त वृद्धि के लिए एवं अपव्यय व अवरोधन कम से कम हो इसके लिए स्कूलों के साथ बालवाड़ी भी संलग्न की गई ताकि बालिकाएँ स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए उत्सुक हो। सन् 2002 में तो बालिकाओं को निःशुल्क पुस्तकें तथा पाठ्य सामग्री उपलब्ध करायी गयी। महिला शिक्षकों के रहने हेतु सरकारी क्वाटर्स बनाये गये हैं।

बालिकाओं के सामाजिक आर्थिक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए 1957-58 से ही सरकार द्वारा विभिन्न कदम उठाये गये हैं जिसमें स्कूलों में दाई (माताओं) की नियुक्ति बालिकाओं तथा अध्यापिकाओं के लिए क्वाटर्स का निर्माण प्रमुख है। इन सब सुविधाओं से बालिकाओं के नामांकन में पर्याप्त सुधार हुआ है।

आदिम समाज एवं सभ्य समाज में अंतर स्पष्ट कीजिए।

वर्ष 1987-88 से हमारे देश में शिक्षा अत्यन्त तीव्र गति से लोकप्रिय हुई और लगभग 50 प्रतिशत बालिकाएँ बालकों के विद्यालय में अध्ययन करती हैं।

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