बहुलवाद एवं बहुल संस्कृतिवाद में अन्तर बताइए।

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बहुलवाद एवं बहुल संस्कृतिवाद में अन्तर

  1. बहुलवाद का सम्बन्ध एक ऐसी दशा से है जिसमें सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था के अंदर अनेक उप-व्यवस्थाएँ साथ-साथ विद्यमान होती हैं। इसका तात्पर्य है कि इन सभी क्षेत्रों में विभिन्न समूहों और वर्गों की प्रस्थिति में मित्रता होने के बाद भी वे एक समाज का अभिन्न अंग बने रहते हैं। दूसरी ओर बहुल संस्कृतिवाद का सम्बन्ध एक समाज में पाये जाने वाले सांस्कृतिक समूहों की मित्रता से ही होता है इस दृष्टिकोण से बहुत संस्कृतिवाद की तुलना में बहुलवाद की अवधारणा अधिक व्यापक है।
  2. बहुलवाद का सम्बन्ध एक ऐसी दशा से है जिसमें एक-दूसरे से भिन्न विशेषताओं वाले समूह अपनी सांस्कृतिक विशेषताओं को बनाये रखने के बाद भी पारस्परिक सहयोग और सहिष्णुता को अधिक महत्व देते हैं। यह प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से चलती रहती है। बहुत संस्कृतिवाद से सम्बन्धित सहिष्णुता और पारस्परिक सहयोग की प्रकृति काफी कुछ नियोजित होती है। उदाहरण के लिए, आज मानवाधिकार, सामाजिक और आर्थिक शक्तियों के बंटवारे तथा बहुत से कानूनों के द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक समूहों के बीच सहयोग को प्रोत्साहन देने का प्रयत्न किया जाता है।
  3. बहुल-संस्कृतिवाद की दशा में समाज के वंचित और दुर्बल लोगों को विशेषसंरक्षण देकर उन्हें देश की मुख्य धारा से जोड़ना राज्य का दायित्व होता है लेकिन बहुलवाद में इस दशा का होना अनिवार्य नहीं होता।
  4. बहुलवाद की दशा में यह सम्भव है कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में शक्तिशाली समूह अधिक-से-अधिक सुविधाओं पर अपना अधिकार कर लें। इसके बाद भी जैसे-जैसे विभिन्न क्षेत्रों में शक्ति के बंटवारे में समानता बढ़ने लगती है, बहुल-संस्कृतिवाद के रूप में एक ऐसी व्यवस्था को प्रोत्साहन मिलने लगता है जिसकी प्रकृति लोक कल्याणकारी हो।

माध्यमिक विद्यालयों में निर्देशन एवं परामर्श के सम्बन्ध में मुदालियर आयोग के सुझाव।

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