अनुच्छेद 352 की विवेचना कीजिए।

युद्ध या बाह्य आक्रमण या ‘सशस्त्र विद्रोह’ से उत्पन्न आपात अनुच्छेद 352 की विवेचना, यदि राष्ट्रपति को इस बात का समाधान हो जाये कि गम्भीर संकट विद्यमान है जिससे कि युद्ध या बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से भारत या उसके राज्य क्षेत्र के किसी भाग की सुरक्षा संकट में है, तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति संकटकाल की घोषणा कर सकता है। ऐसे संकट की आशंका की स्थिति में भी राष्ट्रपति के द्वारा संकटकाल की घोषणा की जा सकती है।

42वें संवैधानिक संशोधन के पूर्व यह व्यवस्था थी कि अनुच्छेद 352 के अधीन संकटकाल की घोषणा पूरे देश के लिए ही की जा सकती थी, देश के केवल किसी एक या कुछ भागों के लिए नहीं। इस संवैधानिक संशोधन द्वारा अब यह व्यवस्था की गयी है कि राष्ट्रपति अनुच्छेद 352 के अधीन संकट की घोषणा पूरे देश के लिए या देश के किसी एक या कुछ भागों के लिए कर सकते हैं।

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संकटकाल घोषित करने की विधि तथा उसकी अवधि

राष्ट्रपति के द्वारा घोषित संकटकाल की घोषणा को दो महीने के अन्दर संसद के प्रत्येक सदन में प्रस्तुत करना आवश्यक है। संकटकाल की घोषणा होने के दो माह के पश्चात् संकटकाल समाप्त समझा जायेगा, यदि इसकी समाप्ति के पूर्व संसद के दोनों सदन प्रस्तावों के आधार पर इसे स्वीकार न कर लें। राष्ट्रपति को अधिकार है कि अपने द्वारा की गयी इस घोषणा को किसी भी समय वापस ले ले।

परन्तु संकटकाल की इस घोषणा के समय अथवा उसके दो माह के अन्दर लोकसभा का विघटन हो गया हो, तो वह संकटकाल नये सदन की बैठक के 30 दिन पश्चात् तक जारी रह सकता है, यदि राज्य सभा दो माह की निश्चित अवधि के अन्दर उसे स्वीकार कर चुकी हो।। लोकसभा की बैठक के प्रारम्भ होने के 30 दिन पश्चात् संकटकाल उसी समय जारी रह सकता है जबकि लोकसभा उसे स्वीकार कर ले।

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