अलाउद्दीन के प्रशासनिक कार्यों का वर्णन कीजिए।

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अलाउद्दीन के प्रशासनिक कार्यों – भारतीय इतिहास में अलाउद्दीन के शासन-प्रबन्ध का महत्वपूर्ण स्थान है। राजस्थ के सम्बन्ध में अलाउद्दीन ने अन्य दिल्ली सुल्तानों की अपेक्षा अधिक गहराई से विचार किया था। और इस सम्बन्ध में अपनी धारणा व्यक्त की थी।

अलाउद्दीन के प्रशासनिक कार्य

अलाउद्दीन ने शासन-सम्बंधी अनेक कार्य किये। अलाउद्दीन के सभी शासन कार्य एक उद्देश्य से प्रेरित थे और यह उद्देश्य था सल्तनत की शक्ति को मजबूत करना उसके कई शासन कार्य से उसकी मौलिक सूझ-बूझ का परिचय प्राप्त होता है।

(क) सैन्य-संगठन

अलाउद्दीन ने सैन्य-व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान दिया और अपनी सेना में बहुत सुधार किया। उसके मुख्य सुधार निम्नलिखित हैं

(1) स्थायी सेना की स्थापना

दिल्ली के सुल्तानों में प्रथम सुल्तन था एक स्थायी सेना का निर्माण किया जो प्रत्येक समय दिल्ली में रहती थी। इस सेना में 4 लाख 75 हजार घुड़सवार थे। पैदल सैनिकों की संख्या इससे भी अधिक थी इस विशाल सेना द्वारा ही अलाउद्दीन विद्रोहियों एवं विरोधियों का दमन करने तथा विशाल साम्राज्य की स्थापना करने में सफल हुआ था।

(2) सैनिकों को नकद वेतन देने की व्यवस्था

अलाउद्दीन ने सैनिकों का वेतन 238 टंका वार्षिक निश्चित किया। सैनिकों को वेतन नकद रूपये के रूप में राजकोष से दिया जाता था। इससे पहले सैनिकों को नकद वेतन के स्थान पर भूमि दे दी जाती थी। अब वे जमीन आदि की चिन्ता से मुक्त हो गये तथा उनका अपने अफसरों से घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित हो गया।

(3) सैनिकों की योग्यतानुसार नियुक्ति

पहले सैनिकों की भर्ती रक्त तथा वर्ग के आधार पर की जाती थी। अतः सैनिक प्रत्यक्ष रूप से सम्राट के प्रति स्वामिप्रक्त नहीं होते थे। वे अपने वर्ग के कल्याण तथा हित का अधिक ध्यान रखते थे अलाउद्दीन सैनिकों को योग्यतानुसार भर्ती, करता था। इस प्रथा के द्वारा प्राचीन व्यवस्था के दोष दूर हो गये।

(4) घोड़ों पर दाग लगावाने की प्रथा

अलाउद्दीन दिल्ली के सुल्तानों में प्रथम सुल्तान था जिसने घोड़े पर दाग लगावाने की प्रथा प्रचलित थी। इससे यह लाभ हुआ कि सैनिक अच्छे घोड़े रखने लगे और अच्छे थोड़े दिखाकर खराब घोड़े रखने की बुराई दूर हो गई। अलाउद्दीन ने सैनिकों की हुलिया लिखवाने का नियम भी बना दिया।

(5) नवीन दुर्गो का निर्माण तथा सैनिक सुधार

अलाउद्दीन ने नवीन दुर्गे का निर्माण किया और उनमें अच्छे सैनिक रखे जिसके कारण मंगोलों के आक्रमण का भय समाप्त हो गया। उसने सेना के लिए अच्छे किस्म के हथियारों की व्यवस्था की और पुराने दुर्गा की मरम्मत भी करवाई।

(ख) बाजार नियंत्रण

आलाउद्दीन को बाजार व्यवस्था का उसकी सैन्य व्यवस्था से बहुत घनिष्ठ सम्बन्ध है। उसके पास एक बहुत बड़ी स्थायी सेना थी जिसका व्यय अधिक था और उसकी पूर्ति राज्य-कोष द्वारा करना असम्भव था। अतः उसने दैनिक उपयोग की वस्तुओं के मूल्य कम कर दिये ताकि कम वेतन में सैनिक अपना जीवन निर्वाह कर सके। इसके लिए उसने निम्नलिखित उपाय किये

(1 ) वस्तुओं का मूल्य निश्चित कर दिया

अलाउद्दीन ने सर्वप्रथम उन वस्तुओं की एक सूची बनवाई जिनका प्रयोग दिन-प्रतिदिन किया जाता था और उनके मूल्य निश्चित कर दिये। अनाज, कपड़ा, तथा अन्य वस्तुओं के मूल्य प्रचलित दर से बहुत कम निश्चित किये गये।

(2) वस्तुओं की पूर्ति की व्यवस्था

अलाउद्दीन ने बाजारों के प्रबन्ध को व्यवस्था की। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने मालगुजारी अनाज के रूप में लेना आरम्भ कर दिया। उसने आशा निकाली थी कि सरकारी सौदागरों के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति किसानों से अनाज नहीं खरीद सकता था। इस व्यवस्था से सरकारी गोदाम अनाज से भरे रहने लगे। यह अनाज नियन्त्रित मूल्य पर बाजार में बिकवाया जाता था। इसी प्रकार अन्य वस्तुएँ एकत्रित की जाती थीं।

(3) वितरण की व्यवस्था

अलाउद्दीन जानता था कि वस्तुओं के मूल्य कम निर्धारित करने से व्यापारियों को नुकसान होगा और वे वस्तुओं को खुले बाजार में बेचना बन्द कर देंगे। अतः इस बात का भी उचित प्रबन्ध किया कि बाजार में प्रत्येक वस्तु उपलब्ध रहें और उनमें किसी प्रकार की मिलावट न हो व्यापारियों के ऊपर कड़ा नियन्त्रण लगाया गया जो व्यापारी कम तौलने थे अथवा निर्धारित दर से अधिक मूल्य लेते थे उन्हें कड़ा दण्ड दिया जाता था कम तौलने वाले व्यापारियों के शरीर से कमी के बराबर मांस काट लेने का आदेश था।

सरकारी नियंत्रण

मूल्य नियन्त्रण के नियमों को कठोरतापूर्वक लागू करने के लिए कई पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई। ‘दीवाने-रियासत’ तथा ‘शहानेमण्डी’ ‘इस कार्य के लिए विशेष रूप से नियुक्त किये गये। इनके नीचे अन्य अनेक कर्मचारी थे जो इन नियमों का उल्लंघन नहीं होने देते थे।

बाजार नियन्त्रण का परिणाम

अलाउद्दीन के बाजार नियन्त्रण से सरकार वे साधारण जनता दोनों को लाभ हुआ चीजें सस्ती हो गई इसलिए लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठ गया। लोगों की सुख-सुविधा में इतनी वृद्धि हो गई कि वे अलाउद्दीन के निरंकुश शासन के प्रशंसक बन गये। राजा कॅम खर्च में एक विशाल स्थायी सेना रखने में समर्थ हुआ हो, व्यापारी वर्ग को इस अवस्था से अवश्य असंतोष हुआ होगा।

अलाउद्दीन की राजस्व नीति

  1. सुल्तान ने भूमि को नपवाकर यह पता लगाया कि कितनी भूमि पर खेती होती है। और उससे राज्य को कितनी आमदनी होती है।
  2. बहुत से लोगों के पास ऐसी जमीन थी जिनका उन्हे भूमिकर नहीं देना पड़ता था। ऐसी सब जमीन जब्त कर ली गई।
  3. राजस्व विभाग के हिन्दू पदाधिकारियों से मालगुजारी सम्बन्धी विशेषाधिकार छीन लिए गये। उन्हें भी भूमि, मकान पर कर देना पड़ता था।
  4. मालगुजारी की दर बढ़ा दी गई। हिन्दुओं का उपज का आधा एवं मुसलमानों को उपज का एक चौथाई भाग भूमिकर के रूप में देना पड़ता था।
  5. मकानों, चरागाह, बाग एवं आयात निर्यात पर भी कर लगाया गया।
  6. जागीर प्रथा बन्द कर दी गई।
  7. हिन्दुओं को जजिया कर देना पड़ता था।

इन सुधारों का सामूहिक परिणाम यह हुआ कि राज्य की आमदनी बढ़ गई और इसका बोझ समाज के सभी वर्गों पर पड़ा।

अलाउद्दीन का मूल्यांकन

विजेता की दृष्टि से अलाउद्दीन का स्थान भारतीय इतिहास में बहुत ऊँचा है लेकिन उसकी सैन्य विजयों के अधिक महत्व उसके शासन-सुधारों का है। एक जन्मजात योद्धा और सैन्य-संचालक होने के साथ-साथ अलाउद्दीन में एक सफल शासक के गुण भी थे। वह प्रथम तुर्क सुल्तान था जिसने एक शक्तिशाली स्थाई सेना की स्थापना की। उसे ऐसा प्रथम तुर्क सुल्तान होने का भी श्रेय प्रदान किया जा सकता है जिसने भूमिकर के नियमों में सुधार किया। उसने सुधारों में मौलिकता के दर्शन होते हैं। अलाउद्दीन खिलजी प्रथम तुर्क सुल्तान था जिसने अपने राज्य को धर्म निरपेक्ष और शासन व्यवस्था को उलेमा के प्रभुत्व से मुक्त किया। राज्य के मामलों में उसका दृष्टिकोण धर्म-निरपेक्ष था लेकिन अपने व्यक्तिगत मामलों में वह कट्टर मुसलमान था। अलाउद्दीन निरक्षर था किन्तु उसे विद्या से अनुराग था।

मगध राज्य के उत्कर्ष पर संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।

शेख निजामुद्दीन औलिया और शेख रूकनुद्दीन जैसे सन्त-महात्माओं ने उसके शासन काल के गौरव में अभिवृद्धि की। वह महान निर्माता भी था उसने दिल्ली में अनेक भव्य भवनों का निर्माण कराया था। अलाउद्दीन अशिक्षित था फिर भी उसमें निजी प्रतिभा थी। वह प्रत्येक प्रश्न को अपने दृष्टिकोण से देखता था। भारत के इतिहास में उनका नाम सदा अच्छे सेनापति तथा योग्य शासन प्रबन्धक के रूप में लिया जायेगा।

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