आधुनिक शिक्षा में फ्रोबेल का योगदान क्या है?

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आधुनिक शिक्षा में फ्रोबेल का योगदान-

  1. क्वीक के ये शब्द फ्रोबेल के प्रति नितान्तः सत्य है कि ‘आधुनिक विचारों की समस्त उच्चकोटीय प्रवृत्तियाँ फ्रोबेल की कृतियों में केन्द्रित हो गयी हैं।’ उसने खेल, हास्तिक कार्य तथा किंडरगार्टेन पद्धति में एकीकरण स्थापित करके इस कथन को चरितार्थ कर दिया है।
  2. शिक्षण-प्रक्रिया में खेल ‘फ्रोबेल’ की ही देन है। यह एक सर्वसम्मत तथ्य है कि बालक खेलने में सुख की भी प्राप्ति करता है और अनुभव के माध्यम से आनंदमय वातावरण में सीखता भी है।
  3. दफ्ती, बाँस, बेंत, कागज आदि के सामान बालकों से बनवाकर शिक्षा में हास्तिक क्रिया का महत्त्व स्थापित किया जिसके विकासस्वरूप शिल्प-युक्त शिक्षा का प्रादुर्भाव हुआ।
  4. शिशु- शिक्षा पर पूर्ण रूप से ध्यान केन्द्रित कर देने वाला फ्रोबेल प्रथम शिक्षा
  5. शिशु को समाज से पृथक नहीं वरन् परिवार व समाज के शिक्षित करने का विचार भी उसी की देन है। सुखद वातावरण में
  6. अनुशासन में दमनात्मक विधि का निषेध तथा उचित वातावरण में बालक का सुधार फ्रोबेल की देन है।

माध्यमिक शिक्षा की संरचना बताइये।

इस प्रकार हम देखते हैं कि आधुनिक शिक्षा में शिशु को प्रमुख स्थान दिलाने, शिल्प के समावेश, दृश्य-श्रव्य सामग्रियों के प्रयोग, मैनुएल, ट्रेनिंग, विद्यालयों में प्राकृतिक वातावरण आदि के प्रचलन में फ्रोबेल का प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष सहयोग है।

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