स्त्रियों को शिक्षा देना क्या आवश्यक है। यदि हाँ तो क्यों?

स्त्रियों को शिक्षा की आवश्यक

महान सेनानायक नेपोलियन का कथन है– “बालक का भावी भविष्य सदैव सकी माता द्वारा निर्मित किया जाता है।”

राष्ट्रपति लिंकन ने कहा है- “मैं जो कुछ भी हूँ और जो कुछ होने की आशा करता हूँ उसके लिए मैं अपनी माता का कृतज्ञ हूँ।” शिक्षित नारी ही अपने परिवार, समाज तथा देश के गौरव को ऊँचा उठाती है। अतः देश की सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उसकी शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए। स्त्री-शिक्षा का महत्त्व निम्नलिखित दृष्टि से अधिक है

1. पारिवारिक दृष्टि से

परिवार में माँ का स्थान तथा महत्व सर्वोपरि है। बालक के व्यक्तित्पर माँ का अमिट प्रभाव पड़ता है। माँ बालक के जीवन में प्रथम शिक्षक के रूप में आती है। शिक्षित स्त्री ही अपने परिवार को सूखी बना सकती है। अतः पारिवारिक उत्तरदायित्व का पालन करने के लिए स्त्रियों का शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है।

2. सामाजिक दृष्टि से

समाज की प्रगति में शिक्षित स्त्रियों का सहयोग आवश्यक है। समाज में महिला और पुरुष दोनों का महत्वपूर्ण स्थान है। परिवार के सीमित क्षेत्र से बाहर निकल कर वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से प्रेरित होकर संपूर्ण समाज की प्रगति में यह सहायक हो सकती है। देश के सामाजिक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए स्त्री-शिक्षा को महत्व देना अनिवार्य है।

3. राजनीतिक दृष्टि से

राष्ट्र की उन्नति के लिए सी-शिक्षा की समुचित व्यवस्था करना आवश्यक है। स्वतंत्र भारत में सियों को पुरूषों के समान सभी अधिकार प्राप्त है। राष्ट्र की उन्नति और सफल बनाने के लिए स्त्रियों पर उतना ही दायित्व है, जितना पुरुषों पर की सफलता शिक्षित स्त्रियों पर निर्भर है। राष्ट्र तथा अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं का ज्ञान शिक्षा द्वारा ही संभव है। अतः सियों को शिक्षित करना देश को प्रगति के पथ पर ले जाना है। आज भारत के राजनीतिक क्षेत्र में जो स्त्रियां महत्वपूर्ण योगदान दे रही है वह सर्वविदित है। राजनीतिक क्षेत्र में कार्य करने कली खियाँ न केवल भारत में, वरन् संपूर्ण विश्व में सम्मान प्राप्त कर रही हैं।

उपभोक्ताओं की शोचनीय दशा के कारण बताइये तथा उपभोक्ताओं के अधिकारों का संक्षेप में वर्णन कीजिये।

4.आर्थिक दृष्टि से

आज की परिवर्तित परिस्थितियों में भारतीय नारियों के कंधों पर पुरुषों के समान ही भार आ पड़ा है। शिक्षा के अभाव में वे विशेष परिस्थितियों का सामना नहीं कर सकती। आज शिक्षित नारी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक क्षेत्र में पुरूषों के समान सक्रिय हो उठी हैं। शिक्षित नारी परिवार और देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सहायक होती है। आर्थिक कठिनाइयों का सामना करने के लिए उन्हें उपयोगी शिक्षा देना आवश्यक है।

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