समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम की उपलब्धियाँ,कमियाँ व प्रभावी कार्यान्वयन हेतु सुझाव।

0
19

समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम की उपलब्धियाँ (Achievements of I.R.D.P.) कुछ इस प्रकार है जिसे हम नीचे पूरे डिटेल में आप सभी छात्र-छात्राओं के साथ शेयर कर रहे हैं। आप सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तयारी करने वाले छात्रों को बता दें की आप सभी के लिए इसी प्रकार के आर्टिकल इस वेबसाइट पर प्रतिदिन शेयर होते हैं जो आप सभी के आगामी परीक्षा के लिए उपयोगी है।

इसे भी पढ़ें👉 समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) का विकास कब हुआ? इसके उद्देश्य एवं कार्य बताइए।

समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) के अंतर्गत 1986-87 ई. तक कुल 34.7 लाख लोगों को 977.8 रु. के ऋण प्राप्त हुए है। भारत सरकार ने 1993-94 में समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) के लिए 834 करोड़ रु. परिव्यय का प्रावधान है जिसमें TRYSEM को 13 करोड़ DPAD 77 करोड़ रु. DDP को 75 करोड़ रुपये व IRDP को 630 करोड़ स्वीकृत है। इसमें IRDP से गरीबी हटाओ कार्यक्रम आर्थिक सहायता एवं ऋण देने की योजना है।(Annual Budget 1993-94 Vol. 1, Chaper VII, Page 27-88)

छठी पंचवर्षीय योजना (1980) में समन्वित गामीण सहायता कार्यक्रम (IRDP) के अन्तर्गत प्रत्येक विकास खण्ड में 3000 परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करनी थी, लेकिन 600 परिवार प्रत्येक खण्ड पर लाभान्वित हुए।

इसे भी पढ़ें👉 सामाजिक समस्या की अवधारणा, अर्थ एवं परिभाषा।Concept of Social Problem-Meaning and Definition

सातवी योजना में 300 रु. की आय सीमा के लाभार्थी भी सम्मिलित किए हुए और आठवीं योजना से 1.49 करोड़ लोगों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। सरकार ने ग्रामीण विकास हेतु 1995-96 ई. में जहाँ 7700 करोड़ रु. व्यय किए, वहीं व्यय 1999-2000 ई. में बढ़कर 9650 करोड़ रु. तक पहुंच गया है। इसके अंतर्गत 1996-97 ई. में (IRDP) पर 1100 करोड़ रु. जवाहर रोजगार योजना (JRY) पर 1665 करोड़ रु. वेजगार इन्श्योरेन्स स्कीम (EAS) पर 2400 करोड़ रु. प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY) पर 173 करोड़ रु. इन्दिरा आवास योजना पर 1710 करोड़ रु. व्यय हुए है।

इसे भी पढ़ें👉 महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम कब पारित किया गया? विस्तृत वर्णन

समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम की कमियाँ व प्रभावी कार्यान्वयन हेतु सुझाव (Deficiencies of I.R.D.P. and suggestions for effective Implementation)

समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम में लाभार्थी चयन व नियोजन प्रक्रिया ठीक प्रकार से नहीं अपनाई गई, जिसमें अपात्र लाभार्थियों का चयन हुआ, इसका कुप्रभाव निर्धन परिवारों पर अधिक पड़ा क्योंकि वे ऋण एवं आर्थिक सहायताओं से वंचित रहे। आज यही कारण है कि IRDP जैसी योजना क्रियान्वित होने के बाद भी गरीबी ज्यों की त्यों है, क्योंकि गांवासियों में IRDP कार्यक्रम केवल “खाओ पिओ योजना” बनकर रह गई, यह सोच भारत के लिए हानिकर है।

इसे भी पढ़ें👉 आधुनिकीकरण,आधुनिकीकरण की परिभाषा तथा इसकी विशेषताएँ।Modernization

समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) में उचित पात्र का ही चयन हो जिससे लाभार्थी पात्र समय से आय प्राप्त कर सकें।

  1. समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) में उचित पात्र का ही चयन हो जिससे लाभार्थी पात्र समय से आय प्राप्त कर सकें।
  2. IRDP से ऋण अदायगी की प्रक्रिया में विकास खण्ड अधिकारियों व बैंक अधिकारियों को जागरुक होना चाहिए।
  3. IRDP के अंतगत भारत सरकार ने ऋणों की सीमा 5000 से बढ़ाकर 10,000 रु. तक कर दी है। इसके लिए किसी जमानत की आवश्यकता नहीं होना चाहिए।
  4. समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) के अन्तर्गत प्रदत्त ऋणों पर ब्याज की दर 10 प्रतिशत है, जो अधिक है, अतः इसे कम करने की आवश्यकता है।
  5. समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) के ऋण प्राप्तकर्ता को पासबुक (Pass Books) निर्गत होनी चाहिए, जिसमें छूट की धनराशि व बैंक के अदायगी धन का ब्यौरा हो।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here