शैक्षिक एवं व्यावसायिक सूचना प्रसारण की कौन सी विधियों है? आपको इसमें से कौन सी विधि अच्छी लगती है? और क्यों?

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शैक्षिक एवं व्यावसायिक सूचना प्रसारण की विधिया

शैक्षिक एवं व्यावसायिक सूचना वर्तमान समय में निर्देश कार्य में व्यवसायगत सूचनाओं का बड़ा महत्व है। यदि किसी निर्देशक के पास पर्याप्त मात्रा में व्यवसायों से सम्बन्धित सूचनाएं नहीं हैं तो वह कभी सफलतापूर्वक निर्देशन कार्य नहीं कर सकता है, क्योंकि निर्देशक का अन्तिम कार्य व्यक्ति को इस योग्य बना देना है कि वह अपनी रुचि, योग्यता तथा क्षमता के आधार पर उचित व्यवसाय का चयन कर सके। जहाँ चयन का प्रश्न आ जाता है वहाँ पर बाहुल्य भी अवश्यक होता है। एक में से कभी भी चयन नहीं हो सकता। चयन केवल बहुसंख्यक में से ही होता है। यदि निर्देशक के पास पर्याप्त मात्रा में व्यवसायगत सूचनाएं नहीं है तो परामर्श-प्रार्थी अपनी सुविधानुसार चयन न कर सकेगा। दूसरे, इसमें निर्देशक भी सफलतापूर्वक कार्य नहीं कर सकता है। व्यवसायगत सूचनाओं में हम किसी व्यवसाय एवं कार्य से सम्बन्धित समस्त प्रकार की सामग्री का समावेश करते हैं। इस प्रकार इसमें वे समस्त सूचनाएँ आ जाती हैं जिन्हें कोई व्यक्ति व्यवसाय या कार्य (Job) में प्रवेश करने से पूर्व ज्ञात करना चाहता है। इन्हीं विचारों को हॉपोक (Hoppock) महोदय ने इस प्रकार व्यक्त किया है- “प्रत्येक प्रकार की वह सूचना जो किसी स्थिति, कर्म एवं व्यवसाय से सम्बन्धित होती है तथा जो नये प्रवेशार्थी को उपयोगी हो सकती है, व्यवसायगत सूचना कहलाती है।” सरल शब्दों में, व्यवसायगत सूचना के अन्दर हम व्यवसाय या कर्म के लिए आवश्यक योग्यता, शिक्षा, प्रवेश के उस बौद्धिक योग्यताएँ, आर्थिक पहलू, उन्नति के अवसर आदि का समावेश करते हैं।

व्यावसायिक सूचना सामग्री के प्रकार

किसी व्यवसाय से सम्बन्धित सूचनाएँ हमें अनेक साधनों से प्राप्त हो सकती हैं। सूचना के साधनों के अनुसार हम सूचना सामग्री का ही श्रेणी विभाजन करते हैं। इस तरह व्यवसायगत सूचना-सामग्री निम्न प्रकार की हो सकती है

  1. व्यावसायिक पत्रिकाएँ – अनेक व्यावसायिक पत्रिकाएँ विभिन्न व्यवसायों के सम्बन्ध में सूचनाएँ प्रकाशित करती हैं। इस प्रकार को परिकार छात्रों के लिए अत्यन्त उपयोगी होती है क्योंकि ये किसी व्यवसाय से सम्बन्धित विस्तृत सूचना प्रदान करती है।
  2. व्यावसायिक सूचनाएँ – कुछ संस्थाएँ किसी एक व्यवसाय से सम्बन्धित पृथक रूप से सूचना प्रकाशित करती हैं। उदाहरण के लिए ‘याताय सेवाएँ’ ‘नो योर कैरियर इत्यादि ये सूचनाएँ किसी एक व्यवसाय के सम्बन्ध में सूक्ष्म सूचनाएँ प्रदान करती हैं।
  3. व्यवसाय- अध्ययन-कुछ संस्थाएँ या व्यक्ति किसी एक विशिष्ट व्यवसाय के सम्बन्ध में विस्तृत अध्ययन करते हैं। व्यवसाय से सम्बन्धित उनके अध्ययन की रिपोर्ट उस व्यवसाय से सम्बन्धित विस्तृत सूचनाएं प्रदान करती है।
  4. जीवनियाँ – अनेक व्यक्ति अपने जीवन की आत्मकथाएँ लिखते हैं। वे अपनी आत्मकथा में उस व्यवसाय के सम्बन्ध में कुछ प्रकाश डालते हैं। इनके अध्ययन से भी उस व्यवसाय के सम्बन्ध में उस व्यक्ति के अनुभवों से ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।
  5. श्रव्य दृश्य सामग्री- कुछ फिल्में चार्ट्स, मैजिक लालटेन इत्यादि भी विभिन्न । व्यवसायों के सम्बन्ध में विस्तृत सूचनाएं प्रदान करती हैं।

व्यावसायिक सूचना का संगठन

व्यवसायिक सूचना-सेवाओं का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है-व्यवसायगत सूचनाओं का संगठन करना यदि व्यवसायगत सूचनाएं अपर्याप्त हैं, वे छात्रों को पूरी-पूरी सूचनाएं प्रदान नहीं करती है, तो उनके उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो सकती है।

सूचना प्राप्ति के साधन

वर्तमान में कार्य जगत् इतना विशाल है कि समस्त सूचनाएं केवल फर्मों या कार्यालयों में ही प्राप्त नहीं की जा सकती हैं। दूसरे, यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि भारत में अन्य पाश्चात्य देशों की भाँति व्यवसायगत सूचनाएँ देने की पृथक से संस्थाएँ नहीं हैं। विदेशों में कुछ संस्थाएँ व्यावसायिक स्तर पर यह कार्य करती है तथा कुछ संस्थाएँ इसे ऐच्छिक कार्यों में सम्मिलित कर उपयोगी सेवा करती हैं।

जहाँ तक भारत का प्रश्न है, निर्देशन को निम्नांकित सूत्रों से विभिन्न व्यवसायों से सम्बन्धित सूचनाएँ प्राप्त हो सकती हैं

  1. विभिन्न व्यक्तिगत फर्म व प्रशासन के अधिकारियों में।
  2. वोकेशनल काउन्सिलिंग ब्यूरो, वाई० गाई०एम०सी०ए०, कलकता व इन्दौर
  3. कैरियर्स इन्स्टीट्यूट 94 बेवर्ड रोड, नई दिल्ली।
  4. दी [मैनेजर डिस्ट्रीब्यूशन सेक्सन, पब्लिकेशन डिवीजन, ओल्ड सेक्रेटेरिवेट, दिल्ली।
  5. सेन्ट्रल ब्यूरो ऑफ एजूकेशनल एण्ड वेकेशनल गाइडेन्स, 33 छात्र मार्ग, दिल्ली-61
  6. मानसायन, 32 फैज बाजार, दिल्ली-61
  7. यूनीवर्सिटी बुक कम्पनी, सिविल लाइन्स, इलाहाबाद।
  8. दी गवर्नमेण्ट बुक डिपार्टमेण्ट, मेयो रोड, फोर्ड, बम्बई
  9. ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी प्रेस, मर्केन्टाइल बिल्डिंग, कलकत्ता।
  10. ब्यूरो ऑफ वोकेशनल एण्ड एजुकेशनल काउन्सिलिंग, कलकत्ता-161
  11. यू०पी० ब्यूरो ऑफ साइकोलॉजी, इलाहाबाद
  12. राजकीय शैक्षणिक एवं व्यावसायिक निर्देशन केन्द्र, बीकानेर, राजस्थान।
  13. सेन्ट्रल इन्स्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, दिल्ली-6
  14. डाइरेक्टोरेट ऑफ एक्सटेन्शन प्रोग्राम्स फार सेकेण्ड्री एजुकेशन, नई दिल्ली।
  15. व्यवसाय सूचना अधिकारी, गुजरात राज्य, इलाहाबाद।
  16. विभिन्न राज्यों का निर्देशन केन्द्र।
  17. रोजगार दफतर तथा श्रम कल्याण दफतर
  18. डाइरेक्टोरेट जनरल ऑफ एम्प्लायमेण्ट एण्ड ट्रेनिंग,
  19. गुरुद्वारा रोड, नई दिल्ली।
  20. मनोविज्ञानशाला, उ०प्र० इलाहाबाद।
  21. मिनिस्ट्री ऑफ साइन्टीफिक रिसर्च एण्ड कल्चरल एफेयर्स, नई
  22. डाइरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज, नई दिल्ली।
  23. मिनिस्ट्री ऑफ एजूकेशन, 31 कम्युनिकेशन बिल्डिंग, नई दिल्ली।
  24. मिनिस्ट्री ऑफ एजूकेशन, इनफॉरमेशन सेक्सन, नई दिल्ली। यूनीवर्सिटी एम्पलायमेण्ट ब्यूरोज
  25. रोटरी इन्टरनेशनल, रोटरी क्लव, हैदराबाद।
  26. मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे रेल भवन, नई दिल्ली।

सूचनाओं का प्रसारण

विविध सोगो के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों से व्यावसायिक सूचनाएं एक करके उनका वैज्ञानिक विधि से श्रेणी विभाजन करने और पंजीयन करने से ही व्यावसायिक सूचना केन्द्र का कार्य पूरा नहीं हो पाता है। वास्तविक कार्य तो एकताओं को छान है। यदि एकत्रित सूचनाएं सूचना केन्द्र की चहारदीवारी तक ही सीमित रहती हैं तो यह सेवाएँ निरर्थक होगी। इनका पूरा-पूरा उपयोग छात्र तथा छात्र के माता-पिता द्वारा किया जाना चाहिए। इसलिए सूचना केन्द्र अपने छात्रों तक अग्रांकित तरीकों से व्यवसाय सूचनाएँ पहुँचा सकता है-

1, अभिस्थापन वर्ताएँ एवं भाषण (Orientation Talks & Lectures )

भाषण तथा बातचीत के द्वारा निर्देशक बड़ी सरलता से व्यावसायिक सूचनाओं को छात्रों के पास पहुँचा सकता है। भाषण किसी व्यवसाय से सम्बन्धित व्यक्ति द्वारा दिये जा सकते हैं। सर्वोत्तम विधि है कि भाषण ऐसे सफल कार्यकर्ताओं द्वारा दिलवाये जायें जो कभी सम्बन्धित संस्था का छात्र रहा था। प्राचीन छात्र (Ex-Student) द्वारा जो इस समय किसी व्यवसाय में प्रतिष्ठित स्थान पर है, भाषण सर्वोतम होता है।

2.प्रदर्शनी (Career Exhibition )

कैरियर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी के माध्यम से भी व्यवसायगत सूचनाएँ छात्रों, शिक्षकों तथा अभिभावकों को दी जा सकती हैं।

3. श्रव्य दृश्य सामग्री ( Audio visual Material)-

फिल्म, रेडियो, टेलीविजन आदि के द्वारा सही-सही सूचनाएँ प्रदान की जा सकती हैं। फिल्म का इस दृष्टि से बड़ा महत्व है क्योंकि फिल्म में श्रमिक आदि व्यवसाय में किस प्रकार कार्य करते हैं, छात्र इसका वास्तविक रूप देख पाते हैं।

4. वार्तालाप (Discussion)-

पारस्परिक वार्तालाप के द्वारा भी व्यवसायगत सूचनाएँ छात्रों तक पहुँचाई जा सकती हैं। वार्तालाप के लिए आवश्यक है कि छात्रों को पहले ही सूचित कर दिया जाये।

5. भ्रमण (Tour )

वास्तविक रूप से कार्य स्थल पर छात्रों को ले जाकर भी कार्य या व्यवसाय के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्रदान की जा सकती है। इसके लिए यह आवश्यक है कि निर्देशक पहले ही इस स्थान का मम कर आये अच्छा हो ऐसे कार्य स्थलों का भ्रमण किया जाए जहाँ संस्था के पूर्व छात्र किसी प्रतिष्ठित पद पर हो। किन्तु यह कार्यप्रणाली अपव्ययी है।

6. विद्यालय विषयों

द्वारा कभी-कभी विद्यालय में भी किसी विषय में किसी व्यवसाय का सन्दर्भ आ जाता है तो इस विषय का समन्वय सूचनाओं से करके भी छात्रों को सम्बन्धि सूचना प्रदान की जा सकती है।

कार्य निर्धारण द्वारा

छात्रों को कार्य दिया जा सकता है कि वे अमुक व्यवसाय के सम्बन्धित सूचना एकत्रित करके लायेंगे। इससे छात्रों में स्वाध्याय की आदत तो पड़ती ही है, साथ ही साथ छात्रों को सूचना भी मिल जाती है।

स्थानीय व्यक्तियों द्वारा

कभी-कभी स्थानीय व्यक्तियों द्वारा भी सूचनाएं दिलवाई जा सकती हैं। उदाहरण हेतु गाँव के प्रमुख किसान द्वारा गाँव के एक ऐसे व्यक्ति द्वारा जो सेना में है और छुट्टियों में आया है या और व्यवसाय में है और छुट्टियों में आया है।

9. पुस्तकालय द्वारा

पुस्तकालय में व्यवसायों से सम्बन्धित सूचनाएँ रख कर भी सूचनाएं छात्रों तक पहुंचाई जा सकती हैं।

10. विद्यालय वातावरण

द्वारा विद्यालय के वातावरण को कभी-कभी ऐसा बना दिया जाता है कि छात्रों को स्वयं ही सूचना प्राप्त हो जाती है। उदाहरण हेतु समय-समय पर सूचनापट पर व्यवसाय से सम्बन्धित सूचनाएँ लगाई जा सकती है तथा विज्ञापन के टुकडे लगाये जा सकते हैं। इस प्रकार अनेक प्रकार से व्यवसाय सूचना केन्द्र व्यवसाय से सम्बन्धित सूचनाएं छात्रों, अभिभावकों तथा अन्य व्यक्तियों तक पहुंचा सकता है।

सूचना सेवा की आवश्यक सामग्री

प्रत्येक व्यावसायिक सूचना केन्द्र के पास सफल सेवाओं के लिए न्यूनतम मात्रा में बेटिजर (Bedinger) के अनुसार निम्न सामग्री अवश्य ही होनी चाहिए। बिना इतनी सामग्री से कोई भी सूचना केन्द्र सफलतापूर्वक अपने छात्रों व्यवसायों से सम्बन्धित सूचनाएँ प्रदान नहीं कर सकता है

जाति व्यवस्था के उत्पत्ति सम्बन्धी प्रमुख सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।

  1. करीब 100 व्यवसायों प्रमुखतया स्थानीय से सम्बन्धित पुस्तिकाएँ।
  2. निम्नांकित से सम्बन्धित पत्रिकाएँ
  • (i) नियोग अभिरुचि राष्ट्रीय एवं स्थानीय,
  • (ii) व्यवसाय चयन सिद्धान्त,
  • (iii) व्यवसाय प्राप्ति के उत्स
  • (iv) सुअध्ययन एवं कार्यादतें
  • , (v) राजकीय एवं राष्ट्रीय श्रम अधिनियम,
  • (vi) व्यवसायों से सम्बन्धित सरकारी एजेंसियाँ
  1. नियम- सूचियाँ (Catalogue)
  • (i) राज्य के कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों की
  • , (ii) राष्ट्र प्रमुख कॉलेजों व विश्वविद्यालयों की,
  • (iii) तकनीकी शिक्षा संस्थाओं की,
  • (iv) व्यावसायिक संस्थाओं की।

4.डाइरेक्टरीज

  • (i) समस्त कॉलेजों व विश्वविद्यालयों की,
  • (ii) व्यावसायिक व तकनीकी संस्थाओं की,
  • (iii) पत्र-व्यवहार संस्थाओं की।
  1. छात्रवृत्ति (Scnolarship) तथा ऋण सुविधाओं की सूचनाएँ।
  2. प्रमुख व्यावसायिक पत्रिकाएँ।
  3. व्यावसायिक निर्देशन पत्रिकाएँ।

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