शिक्षा को मनुष्य एवं समाज का निर्माण करना चाहिए।” विवेचना कीजिए।

अक्षरशः यह कथन पूर्णतः सत्य प्रतीत होता है कि शिक्षा को मनुष्य एवं समाज का निर्माण करना चाहिए। क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहकर ही वह अपना सम्पूर्ण विकास करता है। इस सन्दर्भ में प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री रेमण्ट का कहना है कि “समाज-विहीन व्यक्ति कोरी कल्पना है।” यह कोई जारी नहीं है कि व्यक्ति समाज के बीच रहकर ही अपनी आवश्कताओं को पूरा कर सकता है तथा अपना बहुमुखी विकास प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। समाज के हित में ही व्यक्ति का हर एक प्रकार से हित है और अलग से उसका कोई अस्तित्व नहीं है। व्यक्ति और समाज का वह अटूट सम्बन्ध ऐसी शिक्षा का समर्थन करता है, जो समाज का अधिक से अधिक हित कर सके, क्योंकि समाज का विकसित एवं कल्याणकारी स्वःप स्वयंमेव ही व्यक्ति का उत्थान कर देगा। इसके अतिरिक्त समाज अथवा राज्य का स्थान व्यक्ति से अधिक ऊंचा है।

प्रारम्भिक शिक्षा सर्वीकरण के सम्बन्ध में सुझाव दीजिए।

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