शिक्षा के वैयक्तिक विकास एवं सामाजिक विकास के कार्यों का वर्णन कीजिए।

शिक्षा के वैयक्तिक विकास

वैयक्तिक विकास से तात्पर्य उन परिस्थितियों, आवश्यकताओं, आकांक्षाओं के उन्नयन से है जिससे प्रत्येक व्यक्ति की निजी जिन्दगी की अलिभाषा की पूर्ति होती है। व्यक्ति की सृजनात्मकता का प्रस्फुटन होता है। शिक्षा व्यक्तिगत या वैयक्तिक विकास का अनुपम साधन है। यह हर क्षण, मानव के वैयक्तिक विकास हेतु दिशा-निर्देशन प्रदान करती है। संक्षेप में, शिक्षा के वैयक्तिक विकास कार्य सम्मिलित है।

  1. जन्मजात शक्तियों का विकास
  2. व्यक्तित्व का बहुमुखी विकास
  3. मूल प्रवृत्तियों पर नियंत्रण
  4. जीवकोपार्जन के साधन उपलब्ध कराना
  5. भाषा ज्ञान तथा मानसिक शक्तियों का विकास करना इत्यादि ।

सामाजिक समूह का अर्थ लिखिए। सामाजिक समूह के वर्गीकरण के प्रकारों की विवेचना कीजिए।

शिक्षा का सामाजिक विकास के प्रमुख कार्य निम्नवत् हैं

  1. समाज के सभी लोगों का शारीरिक और मानसिक शक्तियों का विकास।
  2. समाज के सभी लोगों ज्ञान, विज्ञान व भाषा का ज्ञान कराना।
  3. सभी लोगों को सामाजिक लक्ष्यों से परिचित कराना और उनकी प्राप्ति की ओर अग्रसर होना।
  4. सभी लोगों को धर्म-दर्शन का ज्ञान कराना।
  5. समाज के सभी लोगों का सामाजिक एवं सांस्कृतिक (6) राज्य की शासन प्रणाली से समाज के सभी लोगों को परिचित कराना। मूल्यों का विकास करना।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top