वैदिक शिक्षा प्रणाली के गुणों और दोषों का वर्णन कीजिए।

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वैदिक शिक्षा प्रणाली के गुणों का वर्णन

प्राचीन शिक्षा के गुणों को निम्न प्रकार गिनाया जा सकता है

  1. धर्मनिष्ठ जीवन की प्रधानता,
  2. प्रवेश की आदर्श पद्धति,
  3. उचित आयु में शिक्षा,
  4. घनिष्ठ गुरु-शिष्य सम्बन्ध,
  5. सार्वजनिक तथा निःशुल्क शिक्षा,
  6. ब्रह्मचर्य पालन का महत्व,
  7. कठोर जीवन का अभ्यास,
  8. गुरुकुल प्राणली
  9. भिक्षाटन का मनोवैज्ञानिक आधार,
  10. पाठ्यक्रम की विशालता एवं विविधता,
  11. स्त्री शिक्षा की महत्ता,
  12. व्यक्तित्व के विकास पर बल,
  13. राज्य नियन्त्रण से मुक्त गुरुकुल,
  14. समावर्तन संस्कार,
  15. शारीरिक दण्ड सम्बन्धी मनोवैज्ञानिक अवधारणा

भारतीय ग्रामीण जीवन के आधारभूत लक्षण लिखिए।

वैदिक शिक्षा प्रणाली के दोषों का वर्णन

  1. शिक्षक की प्रमुखता गुरु अपने अनुसार सारी शिक्षा प्रक्रिया का निश्चय करता था और बालक का विकास गुरु अपने दृष्टिकोण से करता था।
  2. धर्म की प्रधानता- धर्म को अधिक महत्व दिये जाने के कारण लौकिक शिक्षा की उपेक्षा हो जाती थी। जबकि सांसारिक प्रगति के लिए भौतिक विकास आवश्यक होता था।
  3. हस्त शिल्पों की उपेक्षा हस्त कुशलता को हेय समझा जाने लगा, इस कारण हस्त शिल्पों का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया।
  4. सभी के लिए समान शिक्षा का अभाव- वर्ण व्ययवस्था के कारण शूद वर्ण तथा उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों के लिए शिक्षा प्रतिबन्धित हो गयी थी।
  5. लोक भाषाओं की उपेक्षा संस्कृत भाषा को अधिक महत्व देने के कारण प्राकृत तथा अन्य लोक भाषायें उपेक्षित रहीं।
  6. शिक्षा की कठोरता प्राचीन शिक्षा में छात्रों के प्रति कठोरता का व्यवहार होने से उनमें कुण्ठा आ जाती थी।

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