लैंगिक विषमता से क्या आशय है?

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लैंगिक विषमता का अर्थ है

लैंगिक विषमता”लिंग के आधार पर महिलाओं पर किसी भी प्रकार का भेदभाव, बहिष्कार या बन्धन लगाना। स्त्री-पुरुष को समानता के आधार पर प्राप्त अधिकारों को कमजोर करना या निष्प्रभावी बनाना। महिलाओं को उनके मानवाधिकारों के साथ साथ उनके राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक या किसी अन्य क्षेत्र की मौलिक स्वतन्त्रताओं के उपभोग या इस्तेमाल से वंचित करना।”

समाज में संगिक विषमता के दो आधार हैं

  • (क) जैविकीय तथा
  • (ख) सामाजिक सांस्कृतिक

ये दोनों ही आधार लैंगिक विषमता को अपने-अपने ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। इसकी सैद्धान्तिक व्याख्या करने से पूर्व लिंग किसे कहा जाता है, उसे समझना होगा। सामान्य भाषा में लिंग का अर्थ व्यक्ति की श्रेणियों तथा व्यक्ति द्वारा रति क्रियाओं दोनों से होता है। किन्तु जीव विज्ञान के सन्दर्भ में लिंग का अर्थ शरीर रचना सम्बन्धी विभेदों से है जो कि स्त्री तथा परुष के मध्य पाए जाते हैं। हमारा लिंग व्यापक रूप में हमारी जैविकीय संरचना जीन्स का परिणाम है।

प्रारम्भिक शिक्षा सर्वीकरण के सम्बन्ध में सुझाव दीजिए।

स्त्री तथा पुरुष के व्यवहार में विभेद क्या लिंग का परिणाम है? इस विषय पर मत भिन्नता पाई जाती है। कुछ विद्वान स्त्री तथा पुरुष के बीच किए जाने वाले व्यवहार विभेद (जो कि किसी न-किसी रूप में सभी संस्कृतियों में पाए जाते हैं) को जीव विज्ञान का कारण मानते हैं, जबकि कुछ विद्वान इसे सांस्कृतिक कारण से मानते हैं। कुछ संस्कृतियों में स्त्रियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे शान्त प्रकृति की हों। स्त्री एवं पुरुष के बीच पाए जाने वाले श्रम विभाजन को कुछ लोग उनमें पाए जाने वाले विभेद के कारण मानते हैं।

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