लैंगिक विषमता के परिणामस्वरूप विकसित भारतीय महिलाओं की किन्हीं दो समस्याओं को बताइये।।

लैंगिक विषमता के परिणामस्वरूप

विकसित भारतीय महिलाओं की दो प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं-

(1) अशिक्षा की समस्या

भारतीय समाज में महिलाओं की शिक्षा पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता रहा है। यद्यपि अंग्रेजी शासनकाल में तथा स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् इस ओर काफी ध्यान दिया गया है, फिर भी महिलाओं में शिक्षा का प्रतिशत पुरुषों की तुलना में कहीं कम है। सन् 2001 की के अनुसार भारत में साक्षरता दर 65.38 प्रतिशत थी। पुरुषों के लिए यह 75 85 प्रतिशत तथा महिलाओं के लिए यह 54.16 प्रतिशत थी। इस तथ्य से सरलता से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि भारतीय समाज में महिलाएँ शिक्षा की दृष्टि से पुरुषों से पिछड़ी हुई है। क्योंकि लड़कियों को पराया धन माना जाता है तथा विवाह ही उनके लिए एक आदर्श माना जाता है, इसलिए उनकी शिक्षा पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता। बहुत-सी लड़कियों, जो शिक्षा संस्थाओं में प्रवेश लेती है, अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पातीं।

परामर्श का क्या अर्थ है? परामर्श की परिभाषा बताइये।

(2) अज्ञानता एवं अन्धविश्वास

अशिक्षा के कारण भारतीय महिलाएं सरलता से अन्धविश्वासों का शिकार हो जाती हैं। उनमें अशिक्षा के कारण अज्ञानता भी अधिक पाई जाती है। इसीलिए अज्ञानता एवं अन्धविश्वास को भारतीय महिलाओं की एक समस्या माना गया है। अज्ञानता एवं अन्धविश्वास के कारण ही महिलाएँ तान्त्रिकों, ढोंगी साधुओं तथा पीरो-फकीरों के चक्कर में सरलता से पड़ जाती हैं जो उनका आर्थिक शोषण करते हैं तथा कई बार तो वे उनके द्वारा यौन शोषण का भी शिकार हो जाती हैं। अज्ञानता एवं अन्धविश्वास के कारण ही भारतीय महिलाएँ व्रत-उपवास में पुरुषों की तुलना में ज्यादा विश्वास रखती हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top