राष्ट्रीय प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम पर टिप्पणी लिखिए।

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राष्ट्रीय प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम

प्रौढ़ शिक्षा के कारगर व्यापक कार्यक्रम से न केवल निरक्षर वा अर्द्ध-साक्षर अर्द्ध एवं शिक्षित लाभान्वित होंगे, बल्कि इससे समाज के सभी प्रौदों को सतत शिक्षा का लाभ मिलेगा और मिलता रहेगा, जिसके आधार पर वे परिवार कल्याण के सभी कारगर उपायों, गाँव-नगर की बढ़िया सफाई के तरीकों, वातावरण संरक्षण के सारे जरूरी ज्ञान-विज्ञान, जनसंख्या की बेरोक-टोक के भीषण नुकसानों, राष्ट्र-समाज की आर्थिक खुशहाली के उपायों तथा स्वयं की अपनी आर्थिक-व्यावसायिक उन्नति की विधियों से, समाज की माँग के मुताबिक परिचित हो सकेंगे।

उपर्युक्त बातों को ध्यान में रखते हुए 2 अक्टूबर 1978 को राष्ट्रीय प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। इसका लक्ष्य 15 से 35 आयु वर्ग के निरक्षर व्यक्तियों को प्रौढ़ शिक्षा की सुविधाएँ प्रदान करना था। इसके प्रमुख उद्देश्य थे

सम्प्रेषण तकनीकी क्या है?

  1. देश के वयस्क आयु वर्ग के निरक्षरों को साक्षर बनाना।
  2. मानवीय साधन का विकास करना।
  3. निरक्षर जनता को राष्ट्रीय विकास की प्रक्रियाओं में भागीदार बनाना।
  4. निरक्षर जन समुदाय में सामाजिक चेतना जगाना।
  5. निरक्षर व्यक्तियों को साक्षरता की बुनियादी सुविधाएँ देना।

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