बाल विकास में अनुशासन के बारे में वर्णन कीजिए।

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बाल विकास में अनुशासन

बाल विकास में अनुशासन विद्यालय में जीवन को नियंत्रित करने के लिए अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाता है। अनुशासन के दो स्वरूप हैं- प्रथम आंतरिक अनुशासन, द्वितीय बाहा अनुशासन आंतरिक अनुशासन वह होता है जिसमें बालकों में स्वतः समझने और उत्तरदायित्व की क्षमता का बोध कराया जाता है, उन्हें उचित और अनुचित का ज्ञान कराया जाता है। जिससे वे स्वयं नियंत्रित हो जाते हैं। दूसरा बाह्य अनुशासन है- इसमें शारीरिक दंड या निंदा किया जाता है और कभी-कभी अच्छी आदतों के बाल विकास के लिए पुरस्कार की सहायता ली जाती हैं। लेकिन अनुशासन स्थायी छाप नहीं छोड़ता है। इसी प्रकार अनुशासन के अन्य नियमों द्वारा बालकों में अच्छी आदतों का विकास और खराब आदतों का निषेध होता है। अनुशासन मूल प्रवृत्तियाँ पर भी अंकुश लगाता है। उन्हें पशुवत जीवन से अलग करता है।

जनजातियों में महिलाओं की प्रस्थिति में हो रहे समकालीन परिवर्तनों का उल्लेख कीजिये।

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