प्लेटो की साम्यवादी विचारधारा का वर्णन।

0
136

प्लेटो ने उच्च वर्ग के लिए साम्यवादी व्यवस्था योजना अपनी ‘रिपब्लिक’ में दी है। इस साम्यवाद को उसने दो भागों में विभाजित किया है- (1) सम्पत्ति एवं (2) पत्नियों का साम्यवाद।

(1) सम्पत्ति का साम्यवाद-

प्लेटो ने देखा कि जिन लोगों के पास राजनीतिक सत्ता तथा आर्थिक सत्ता दोनों है वे जनता का शोषण करते हैं। वह राजनीति तथा अर्थव्यवस्था को अलग-अलग रखना चाहता था।

प्लेटो ने यह व्यवस्था इसलिए दी कि जिन लोगों के हाथों में आर्थिक क्रियाओं के सम्पादन का कार्य है उन्हें राजनीतिक सत्ता से बिल्कुल अलग रखा जाए तथा दूसरी ओर जिन लोगों के हाथों में राजनीतिक सत्ता है उनका आर्थिक क्रियाओं से न तो कोई सम्बन्ध रहने दिया। जाय और न उनके कोई आर्थिक हित ही उसमें निहित हों।

प्लेटो साम्यवाद को इसलिए और भी अनिवार्य रूप में लादना चाहता था क्योंकि उसका विश्वास था कि शासक वर्ग के लिए ज्ञान और धर्म का जानना आवश्यक है। यदि शासक वर्ग को सम्पत्ति में अधिकार दिया जाएगा तो सम्भव है कि वह अपनी आर्थिक शक्ति के कारण सत्ता पर अधिकार कर लेंगे और शासक की योग्यता फिर उसका गुण न होकर अर्थ हो जाएगा। यदि शासक वर्ग को सम्पत्ति से वंचित कर दिया जाता है तो चुनाव होने पर कोई भी व्यक्ति जो अब प्रधान है आगे आने का साहस न करेगा और इस प्रकार ज्ञान और धर्म के आधार पर शासकों का चुनाव सम्भव हो सकेगा। इस प्रकार दार्शनिक राजा तथा ज्ञानी अभिभावक ही प्लेटो के आदर्श राज्य को संभालने में सफल हो सकेंगे।

प्लेटो के न्याय सम्बन्धी विचार व् प्लेटो के न्याय सिद्धान्त का वर्णन।

“सरकार के ऊपर धन के भयानक प्रभाव का प्लेटो को दृढ़ विश्वास था कि उसे दूर करने के लिए उसे स्वयं सम्पत्ति का विनाश करना पड़ा जहाँ तक कि सिपाहियों और शासकों का सम्बन्ध है।”

प्रो. सेबाइन-

“प्लेटो के साम्यवाद का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक है। शासन का उपयोग धन का समानीकरण करने के लिए नहीं करता बल्कि धन का समानीकरण इसलिए करता है जिससे शासन के भ्रष्ट करने वाले प्रभाव नष्ट हो जायें।”

प्रो. सेबाइन

(2) पत्नियों का साम्यवाद-

प्लेटो चाहता था कि परिवार से मुक्त होकर ही मनुष्य राज्य के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है। वह शासक वर्ग तथा सैनिक वर्ग को परिवार के बन्धन में नहीं बाँधना चाहता था। वह इसके लिए एक सम्मिलित परिवार की व्यवस्था करना। चाहता था। उसकी व्यवस्था इस प्रकार थी कि मानव जाति को सुरक्षित रखने के लिए विवाह अवश्य हो, बच्चों का प्रजनन भी हो और पालन-पोषण भी परन्तु वह व्यक्तिगत रूप से न होकर राज्य के द्वारा हो। राज्य आवश्यक उत्पादन कराने के लिए उचित आयु के सर्वोत्तम स्त्री-पुरुषों। को विवाह सूत्र में बाँध दे। यह विवाह उचित ऋतुकाल में हों और इसकी अवधि उतने ही काल तक रहे जब तक निश्चित बालक न उत्पन्न हो जाये। प्लेटो बच्चों को पालने का काम भी राज्य का बताता है। राज्य की ओर से शिशु गृह हों जहाँ समस्त बच्चे रखे जायें। इन बच्चों को यह पता नहीं चलेगा कि उनके माता-पिता कौन हैं और न ही माता-पिता को पता चलेगा कि उनके बच्चे कौन हैं। सभी बच्चे सब व्यक्तियों के होंगे जिन्होंने विवाह किया था। इस प्रकार एक वृहत् परिवार की कल्पना जाग्रत होगी तथा समस्त राज्य में एकता का वातावरण उत्पन्न होगा। वहाँ तेरे मेरे का प्रश्न ही न रहेगा। जब शासक वर्ग एक परिवार का होगा तो विद्रोह की सम्भावना न रहेगी। शासक तथा सैनिक समुदाय इस प्रकार घरेलू ममता मोह से बचे रहेंगे। परिवार के बन्धन से मुक्त होकर सभी व्यक्ति राजकीय सेवा में लग जायेंगे।

समाजशास्त्र की वास्तविक प्रकृति क्या है? समाजशास्त्र को विज्ञान मानने में आपत्तियों का वर्णन कीजिए।

प्लेटो के साम्यवाद की आलोचना-

प्लेटो का शिष्य अरस्तू था। वह अपने गुरु की साम्यवादी विचारधारा की निम्न आलोचना करता है-

  1. अरस्तू कहता है कि मानव की प्राकृतिक इच्छा सम्पत्ति का अधिकार है। जब मानव की इस इच्छा की पूर्ति का कोई मार्ग न रहेगा तो उसका मन उदासीन हो जाएगा। सम्पत्ति द्वारा व्यक्ति के हितों की रक्षा होती है। उसके बिना मानव का विकास रुक जाता है। व्यक्ति का विकास ही समाज का विकास है। जब व्यक्ति का विकास रुक जाता है तो समाज का विकास भी स्वतः रुक जाता है।
  2. राज्य की एकता का आधार शिक्षा है न कि साम्यवाद की स्थापना ।
  3. अफलातून का साम्यवाद एकांगी था, वह विशेषतया बहुसंख्यक समाज के लिए लागू नहीं किया गया था, राज्य या समाज की उन्नति अल्प वर्ग की उन्नति से नहीं मानी जा सकती है।
  4. प्लेटो के साम्यवाद में बालक-बालिकाओं के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं अपनाई गई थी। वे सार्वजनिक समझे जाने पर आम लोगों की उपेक्षा के पात्र बन गये थे।
  5. प्लेटो का पत्नियों का साम्यवाद भी अनैतिक तथा अव्यवस्थित था। उसका कार्य रूप में परिणित होना कतई आसान न था।
  6. प्लेटो के साम्यवाद में बालक-बालिकाओं की कोई व्यवस्था न थी। वह समाज पर भारस्वरूप दिखते थे।
  7. प्लेटो का साम्यवाद संरक्षक वर्ग को कभी संस्तुष्ट नहीं कर सकता था।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here