पाठ्यक्रम के विषय में यूनीसेफ ने क्या निर्देश दिये हैं ?

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प्रासंगिक पाठ्यक्रम विषय तैयार करें

(1) पाठ्यक्रम को लड़कियों के दैनिक जीवन और उनकी महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप बनाइए जो पाठ्यक्रम लड़कियों के जीवन के अनुरूप हैं, तात्पर्य यह कि पाठ्यक्रम शिक्षा को कृषि, पशु-पालन, स्वास्थ्य और पोषक और आहार जैसे विषयों से जोड़ता हो, जो स्थानीय भाषा का प्रयोग करता हो, स्त्री-पुरुष के परम्परागत अन्तर दूर करता हो उसी से लड़कियों को लाभ होगा।

समाजशास्त्र और मनोविज्ञान के मध्य सम्बन्धों को स्पष्ट कीजिए।

शिक्षा को प्रासंगिक बनाने का अर्थ यह नहीं है कि उसे वर्तमान पाठ्यक्रम से एकदम अलग कर दिया जाय। बुनियादी साक्षरता और अंकज्ञान रोजमर्रा की समस्याओं के लिए व्यवहार में लाया जा सकता है।

(2) गणित और विज्ञान में भेद दूर रखें – गणित और विज्ञन जैसे विषयों के प्रति लड़कियों का दृष्टिकोण प्रायः नकारात्मक ही देखा गया है। बहुत-से देशों में यह सिद्ध कर दिया गया है कि उचित वातावरण में समुचित पाठ्यक्रम, निरीक्षण और शिक्षिकाओं की प्रेरणा पाकर लड़कियाँ न केवल इन विषयों में उत्तीर्ण ही होती हैं बल्कि आगे भी निकल जाती हैं।

(3) भविष्य के लिए आज से ही तैयारी करें- अगर पाठ्यक्रमों में लड़कियों के भावी रोजगार की संभावनाओं को बढ़ावा नहीं दिया जाता तो शिक्षा लड़कियों का अहित करती है। शिक्षा द्वारा व्यावसायिक विकल्पों का विस्तार होना चाहिए। बालिकाओं को ऐसा महसूस होना चाहिए कि स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् उनका भविष्य सुनहरा है।

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