निर्देशन का अर्थ बताइये। निर्देशन की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।

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निर्देशन का अर्थ एवं परिभाषा

निर्देशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति को उसकी समस्याओं का समाधान करने के लिए सहायता दी जाती है। वर्तमान समय में मानव जीवन की जटिलताएँ तथा समस्याएँ निरन्तर इतनी अधिक बढ़ती जा रही है कि व्यक्ति स्वयं अपनी कठिनाइयों और समस्याओं का निवारण नहीं कर सकता। उसकी ये कठिनाइयाँ वैयक्तिक,नयाँ सामाजिक, आर्थिक तथा संस्कृति हो सकती है। व्यक्ति के पति और सामाजिक जीवन को सुखी, सफल और उपयोगी बनाने के लिए निर्देशन की आवश्यकता होती है। इस दृष्टि से निर्देशन शब्द के कई अर्थ हो सकते हैं, जैसे- मार्ग प्रदर्शन करना, समस्याओं को सुलझाने में सहायता देना, किसी विशेष परिस्थिति को स्पष्ट बनाने हुए उचित परामर्श देना तथा ऐसी विधियाँ बनाना जिनका प्रयोग करके व्यक्ति स्वयं अपनी समस्याओं को सुलझा सकें। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि निर्देशन वह प्रक्रिया है जिसमें एक व्यक्ति को उसके जीवन की विभिन्न समस्याओं का समाधान करने के लिए सहायता दी जाती है। यह सहायता जिन व्यक्तियों के द्वारा दी जाती है उन्हें परामर्शदाता या निर्देशन कहते हैं।

निर्देशन के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए मनाने निम्नलिखित परिभाषाएं दी हैं

(1 ) जोन्स निर्देशन एक प्रकार की व्यक्तिगत सहायता है जो कि जीवन के लक्ष्यों को निर्धारित करने में, जीवन में अनुकूलन स्थापित करने में और लक्ष्यों की प्राप्ति में उसके सामने आने वाली समस्याओं को सुलझाने में एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को दी जाती हैं।”

जीवन की कठिन परिस्थितियों में बुद्धिमत्तापूर्वक समस्याओं को हल करने के योग्य बनाना। व्यक्ति में आत्म-विश्वास उत्पन्न करना तथा उत्तरदायित्व पालन करने के योग्य बनाना। व्यक्ति के स्वभाव, रुचि, योग्यता तथा उसकी परिस्थितियों का अध्ययन करके, उसके जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने में तथा उसकी प्राप्ति के लिए उचित मनोवैज्ञानिक सहायता देना तथा पथ-प्रदर्शन करना।

निर्देशन की आवश्यकता एवं महत्व

वर्तमान समय में मानव जीवन की जटिलाएँ बढ़ती जा रही हैं जिनके परिणामस्वरूप उसे नित्य नयी-नयी समस्याओं का सामना करना पड रहा है। आज की व्यक्तिगत, सामाजिक, औद्योगिक तथा आर्थिक परिस्थितियां इतनी अस्पष्ट एवं सुविधारहित हैं कि व्यक्ति स्वयं अपनी कठिनाइयों तथा समस्याओं का निवारण नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति में उचित पथ-प्रदर्शन तथा निर्देशन की आवश्यकता होती है। व्यक्ति के लिए निर्देशन की उपयोगिता एवं आवश्यकता के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं

( 1 ) व्यक्तिगत दृष्टिकोण से निर्देशन की आवश्यकता

व्यक्ति को अपने जीवन लक्ष्य की पूर्ति के लिए निर्देशन की सुविधाएँ मिलना आवश्यक हैं। इस प्रकार के निर्देशन की आवश्यकता वैयक्तिक जीवन से सम्बन्धित होती है। इसमें व्यक्ति की रुचि, क्षमताओं और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्देशन दिया जाता है।

(2) सामाजिक दृष्टिकोण से निर्देशन की आवश्यकता

वर्तमान समाज में व्यक्ति अपने को ठीक से व्यवस्थित करने में असमर्थ दिखाई देता है। अतः उसे समाज के प्रति जागरूक करना आवश्यक है जिससे वह समाज की प्रगति में योगदान कर सके। इस प्रकार का निर्देशन सामाजिक जीवन से सम्बन्धित होता है। उचित निर्देशन द्वारा व्यक्ति को प्रशिक्षित करके समाज -का उपयोगी सदस्य बनाया जा सकता है।

(3) पारिवारिक स्थिति में परिवर्तन

पारिवारिक प्रणाली में विघटन होने के कारण तथा रूढ़िवादिता के कारण परिवार में बहुत-सी समस्याएँ उत्पन्न होती रहती हैं। परिवार के सदस्य रूढ़िवादिता तथा अपनी परम्पराओं के कारण एक-दूसरे को उचित निर्देशन नहीं दे पाते अत: परिवार की परिवर्तित दशाओं के कारण निर्देशन की आवश्यकता है।

(4) विद्यालय सम्बन्धी कार्यों में सहायता

व्यक्ति तथा समाज की बढ़ती हुई आवश्यकताओं को पूरा करने में विद्यालय महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करता है। प्रायः माता-पिता तथा अभिभावक अपनी परम्पराओं और महत्वाकांक्षाओं के अनुसार अपने बच्चों को पाठ्यविषयों को चुनने के लिए बाध्य करते हैं। ऐसा करते समय वे अपने बच्चों की रुवियों और क्षमताओं आदि का कोई विचार नहीं करते। आज विद्यालयों में निर्देशन

आज विद्यालयों में निर्देशन का महत्व बढ़ गया है। विद्यालयों में पाठ्यक्रम बहुमुखी हो जाने के कारण विद्यार्थियों के विषय में चयन करने में निर्देशन की सहायता आवश्यक है। वर्तमान परीक्षाओं के परिणाम यह प्रदर्शित करते हैं कि एक बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रतिवर्ष अनुत्तीर्ण होकर समय, श्रम तथा धन नष्ट करते हैं। इस प्रकार की असफलता के कारण विद्यार्थी की अयोग्यता नहीं वरन् रुचि का अभाव, प्रेरणा की कमी तथा संवेगात्मक कठिनाइयाँ होती हैं, जिनके कारण वे परीक्ष में असफल होते हैं। इस प्रकार की समस्याओं का समाधान केवल निर्देशन द्वारा ही हो सकता है।

(5 ) औद्योगिक विकास

आज हमारे देश में नित्य नये-नये उद्योगों की स्थापना हो रही है। विभिन्न प्रकार के उद्योगों एवं व्यवसायों की संख्या में वृद्धि होने के कारण जो समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, उनका समाधान निर्देशन सेवाओं द्वारा ही हो सकता है। निर्देशन द्वारा व्यक्ति अपनी रुचि, योग्यता एवं क्षमता के अनुसार व्यवसाय का चुनाव कर सकता है।

( 6 ) व्यत्तित्व के सर्वागीण विकास के निर्देशन-

शिक्षा का एक प्रमुख उद्देश्य व्यत्तित्व का विकास करना है। अतः व्यत्तित्व के विभिन्न पक्षों के संतुलित विकास के लिए निर्देशन की आवश्यकता होती है।

(2) हसबैण्ड- “निर्देशन को व्यक्ति को उसके भावी जीवन के लिए तैयार करने • समाज में उसे उसके स्थान के लिए उपयुक्त बनाने (फिट करने में सहायता देने के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।”

(3) मॉरिस-“निर्देशन को सहायता प्रदान करने वाली उस प्रक्रिया को कहते है । जिसके द्वारा वह अपनी क्षमताओं का पता लगाने तथा उन्हें विकसित करने का प्रयत्न करता है, जिससे उसका व्यक्तिगत जीवन सुखी और सामाजिक जीवन उपयोगी हो सके।”

(4) स्किनर “निर्देशन नवयुवकों को अपने से, दूसरों से और परिस्थितियों से समायोजन स्थापित करने के लिए सहायता देने की प्रक्रिया है।”

(5) शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रकाशित पुस्तिका, 1957- “निर्देशन एक प्रक्रिया ‘है जो व्यक्ति को शैक्षिक, व्यावसायिक, मनोरंजन सम्बन्धी तथा सामुदायिक सेवा सम्बन्धी कार्यों का चयन करने, तैयार करने, प्रवेश करने तथा प्रगति करने में सहायता देती है।”

उपर्युक्त विवेचन तथा परिभाषाओं से स्पष्ट है कि निर्देशन व्यक्ति को भावी जीवन के लिए तैयार करने में सहायता प्रदान करता है। निर्देशन द्वारा व्यक्ति अपनी बुद्धि, क्षमता, योग्यता तथा अभिरुचियों के विषय में जानकारी प्राप्त करने, जीवन की प्रत्येक स्थिति में, जो कि व्यक्तिगत और सामाजिक समस्याओं से सम्बन्धित होती हैं, अपने को समायोजित करने का प्रयत्न करता है। इस प्रकार निर्देशन द्वारा व्यक्ति को, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विभिन्न परिस्थितियों के उत्तरदायित्व को निभाने योग्य बनाने में सहायता ली जाती है।

शिक्षा गारण्टी योजना (EGS) के कार्यान्वयन के संस्थागत संरचना की विवेचना कीजिए।

निर्देशन के उद्देश्य (Aims of Guidance )

निर्देशन का अर्थ भली-भाँति ज्ञात हो जाने से यह स्पष्ट हो जाता है कि निर्देशन एक ऐसी सहायता है जो व्यक्ति को जीवन-लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दी जाती है। निर्देशन का सम्बन्ध व्यक्तिगत, शैक्षिक तथा व्यावसायिक समस्याओं से होता है। इस दृष्टि से निर्देशन के निम्नलिखित उद्देश्य हैं

  • (1) व्यक्तिगत समस्याओं के निवारण में सहयोग तथा व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहायता देना।
  • (2) बालक-बालिकाओं को अपनी योग्यताओं, क्षमताओं एवं सीमाओं के विषय में ज्ञान प्राप्त करना।
  • (3) अपनी क्षमताओं, योग्यताओं तथा रुचियों का अधिकतम विकास करने में सहायता देना।
  • (4) वातावरण की दशाओं से परिचित कराकर, वातावरण के साथ समायोजन करने में.

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