निर्देशन एवं परामर्श केन्द्रो की आवश्यकता क्या है ? तथा निर्देशन केन्द्री के उद्देश्य क्या है ? व्याख्या कीजिए ।

निर्देशन एवं परामर्श केन्द्रों की आवश्यकता

इन केन्द्रों की आवश्यकता एवं महत्व का उल्लेख किया गया है

  1. तकनीक के छात्रों ने राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान किया है। उद्योग सम्बन्धी कार्य प्रणाली के लिए प्रशिक्षण देकर ज्ञान एवं कौशल का विकास किया जाता है। जिससे तकनीकी विशेषज्ञों में गुणवत्ता लाई जाती है। उनमें अपेक्षित गुणों एवं व्यवहारों का विकास किया जाता है। मानवी शक्ति का उत्पादन में समुचित उपयोग किया जाता है।
  2. किशोरावस्था आयु वर्ग के बालकों के व्यवहारों एवं गुणों का विकास विशिष्ट प्रकार का होता है और उनकी समस्यायें भी विविध प्रकार की होती है। उनकी समस्याओं के समाधान में इन केन्द्रों का विशेष महत्व है। इन्हें नियोजित ढंग से निर्देशन सेवाओं की व्यवस्था की जाए तो उनके कार्य भी सर्जनात्मक तथा सामाजिक उपयोगिता के हो सकते हैं।
  3. विद्यालयों में छात्र विविध प्रकार की समस्यायें लेकर आते हैं, और विद्यालय सम्पति तथा साज-सज्जा को क्षति पहुंचाते हैं। उनका विकास भी समुचित नहीं होता है। इसलिए इन निर्देशन केन्द्र की सेवाओं से इनमें अपेक्षित गुणों का विकास किया जा सकता है और उनकी समस्याओं के समाधान की सहायता की जा सकती है।
  4. विद्यालयों के छात्रों की समस्याओं का समाधान इन केन्द्रों के बिना सम्भव नहीं होता है। यदि निर्देशन दिया भी जाता है उसके परिणाम अपेक्षित प्राप्त नहीं होते है। इसलिए इन केन्द्रों की स्थापना समन्वित भी जानी चाहिए। इन केन्द्र की सेवाओं से छात्रों को विकास हेतु व्यास्तविक सहायता प्रदान की जा सकती है।
  5. निर्देशन एवं परामर्श सेवाओं को विद्यालयी जीवन से अलग नहीं किया जा सकता है। छात्रों के विकास और समस्याओं के समाधान की दृष्टि से निर्देशन एवं परामर्श सेवाओं का सहयोग एवं सहायता आवश्यक है।

परामर्शदाता की योग्यताएं तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में बताइये ।

निर्देशन केन्द्रों के उद्देश्य )

निर्देशन एवं परामर्श केन्द्रों की स्थापना का उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. सैक्षिक निर्देशन देना ।
  2. व्यावसायिक निर्देशन देना ।
  3. व्यक्तिगत एवं सामाजिक निर्देशन एवं परामश ।

इन सामान्य उद्देश्यों का विशिष्ट रूप इस प्रकार है।

(1 ) शैक्षिक निर्देशन देना

शैक्षिक निर्देशन उद्देश्यों को पाँच विशिष्ट रूप में दिया गया है

  1. विशिष्ट बालक, प्रतिभाशाली बालक तथा सर्जनात्मक वालकों की पहचान करना जोर उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास करना।
  2. अधिगम असमर्थी बालकों को निदान करना और उपचारात्मक अनुदेशन तथा साधनों की व्यवस्था करना।
  3. विद्यालय में अध्ययनरत छात्रों की शैक्षिक प्रगति की देख-रेख करना।
  4. छात्रों की अधिगम कठिनाइयों और उनकी क्षमताओं के प्रति सूक्ष्म का विकास करना।
  5. छात्र को आगामी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के सम्बन्ध में सूचना देना और सहायता प्रदान करना।

(2) व्यावसायिक निर्देशन देना

इस उद्देश्य के तीन विशिष्ट रूप दिये गये है

  1. रोजगार सम्बन्धी अवसरों सूचनाओं को एकत्रित करना।
  2. रोजगार सूचनाओं का विश्लेषण करना और विकास करना। समुचित रोजगार/ व्यवसाय का चयन करने में सहायता करना।
  3. स्वयं रोजगार प्राप्त करने हेतु छात्र को सूचनाओं में सहायता प्रदान करना।

(3) व्यक्तिगत समाज सेवी निर्देशन संस्थाएं

  1. विश्वविद्यालय द्वारा संचालित
  2. छात्र मनोविज्ञान केन्द्र

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