निरपेक्ष आय परिकल्पना Absolute Income Hypothesis

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निरपेक्ष आय परिकल्पना Absolute Income Hypothesis- इस कल्पना का प्रतिपादन आर्थर स्मिथीज (Akthur Smithese) ने किया था। उनके अनुसार मूलतः दीर्घकालिक आय-उपभोग अनुपातिक नहीं होते अर्थात् आय में वृद्धि होने के साथ औसत उपभोग (APC) घटती है परन्तु समय श्रेणी समंक (Time Series Data) इस सम्बन्ध को नहीं दर्शाति। उनके अनुसार चालू वर्ष की स्थायी आय चालू वर्ष की मापित आय के बराबर इससे अधिक अथवा कम हो सकती है। यदि चालू वर्ष की मापित आय में वर्तमान चालू वर्ष की मापित आय से अधिक होगी।

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निरपेक्ष आय परिकल्पना Absolute Income Hypothesis

इस परिकल्पना को निम्न रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है प्रस्तुत चित्र में OL रेखा दीर्घकालिक आय तथा सांख्यिकीय दीर्घकालिक उपभोग के मध्य आनुपातिक सम्बन्ध को प्रकट करती है। AA, BB. CC तथा DD सेवायें आय एवं उपभोग के वास्तविक सम्बन्ध को प्रकट करती है। इनसे स्पष्ट हो जाता है कि आय एवं उपभोग का सम्बन्ध गैर आनुपातिक है। दीर्घकालीन प्रवृत्ति की रेखा OL जो आय व उपभोगग के बीच स्थिर अनुपात को प्रकट करती है यह केवल उन उपभोग स्तरों का बिन्दुपथ है जो विभिन्न आय स्तरों पर लगातार ऊपर की ओर विवर्तित होते उपभोग फलन के अनुरूप पाए जाते हैं। दीर्घकाल में उपभोग फलन में विवर्तन निम्न कारणों से होते हैं-

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  1. परिसम्पत्ति स्वामियों की परिसम्पत्ति में वृद्धि होने के कारण आय का अधिक अनुपात उपभोग पर व्यय करने की प्रवृत्ति के फलस्वरूप समय के व्यतीत होने के साथ उपभोग फलन में निरन्तर ऊपर की ओर विवर्तन हुआ है।
  2. ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या का शहरों में आगमन होने तथा श्रमिकों की तुलना में कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों की उपभोग प्रवृत्ति अधिक होने तथा उनमें परिवर्तन होने लगती है।

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