तुर्क आक्रमण के क्या कारण थे?

तुर्क आक्रमण के कारण भारत में तुर्क आक्रमण दो चरणों में हुआ। पहले चरण का आक्रमण महमूद गजनवी तथा दूसरे चरण का आक्रमण मुहम्मद गौरी के नेतृत्व में हुआ। जिनके आक्रमणों के कारण निम्नवत थे।

महमूद गजनवी के आक्रमणों के कारण-

भारत में महमूद के सैनिक अभियानों के कारण विवादास्पद रहे हैं। फिर भी इतना कहा जा सकता है कि महमूद का मुख्य उद्देश्य धन की पशप्ति था। भारत में उसका कोई राजनैतिक स्वार्य नहीं था। इस देश को जीतने या यहाँ साम्राज्य विस्तार करने का कोई लक्ष्य महमूद ने अपने लिए निर्धारित नहीं किया था। एक अन्जान देश में अजनबी लोगों के बीच शासन करने में महमूद को कोई अभिरूचि नहीं थी। वह ईरान और मध्य एशिया को जीतने के लिए अधिक उत्सुक था जो भाषा, धर्म और संस्कृति के दृष्टिकोण से गजनी के समान था। इस क्षेत्र में बिखरे हुए छोटे बड़े राज्यों को जीतना महमूद का लक्ष्य था परन्तु इसके लिए सैनिक साधन जुटाने अनिवार्य और इनके लिए धन की आवश्यकता थी।

महमूद ने भारत से यही धन जुटाने के प्रयास किए क्योंकि उत्तरी भारत के राज्य अत्यन्त सम्पन्ना और समृद्ध थे। आरंभ में महमूद के भारतीय अभियान का क्षेत्र सीमित रहा और उसका संघर्ष सीमावती हिन्दूशाही राज्य के साथ होता रहा। इन युद्धों से धीरे-धीरे महमूद को भारतीय शासकों की आर्थिक सम्पत्राता और सैनिक दुर्बलता दोनों ही का आभास हुआ। धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास बढ़ता गया और उसने अधिक विस्तृत क्षेत्रों में अभियान किए और उनका धन लूटा। इसी लूटे हुए धन से उसने अपने सैनिक संगठन को सुदृढ़ किया और मध्य एशिया एवं ईरान में साम्राज्य निर्माण की प्रक्रिया को सफल ढंग से सम्पना किया। महमूद के आक्रमणों पर यदि ध्यान से दृष्टि डाली जाय तो यह स्पष्ट हो जाता है कि यह भारतीय अभियानों के बाद ही मध्य एशिया के युद्ध लड़ता था और भारत से प्राप्त धन का उपयोग इन अभियानों में करता था।

यद्यपि महमूद का यह प्रत्यक्ष उद्देश्य नहीं या परन्तु उसने भारत से सैनिक साधन प्राप्त करने की कोशिश की थी। भारतीय अभियानों में महमूद ने युद्ध के लिए हाथी भी प्राप्त किये जिनसे उसने मध्य एशिया के प्रतिद्वन्द्रियों पर सैनिक अग्रता प्राप्त कर ली। महमूद ने अपनी सेना में भारतीय सैनिक की भर्ती किए जो उसके और इसके वंशजों के प्रति स्वामीभक्त बने रहे।

महमूद के आक्रमण के धार्मिक चरण इतिहासकारों के बीच एक विवादपूर्ण विषय बने रहे है। धर्मान्ध मुसलमानों ने महमूद को धर्म- युद्धों माना जबकि धर्मान्ध हिन्दुओं ने उसे मंदिरों का विनाशक और हिन्दू-धर्म का संहारक माना। परन्तु मोहम्मद हबीब ने महमूद के आक्रमणों के वास्तविक उद्देश्य को निष्पक्ष और तार्किक ढंग से प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार महमूद ने गजनवी के सिंहासन पर उत्तराधिकार युद्ध के पश्चात् प्राप्त किया था। अतः वह अपनी स्थिति सुदृढ़ करने के लिए खलीफा से सुल्तान के रूप में मान्यता प्राप्त करना चाहता था। इसके लिए उसने खलीफा के समक्ष पत्र लिखकर हिन्दुस्तान पर आक्रमण करने और इस्लाम को सुदृढ़ करने की प्रतिज्ञा की थी। इसके अतिरिक्त मध्य एशिया में साम्राज्य स्थापना के लिए यहाँ के मुसलमानों के बीच अपनी लोकप्रियता में वृद्धि अनिवार्य थी। इसलिए धर्मान्ध मुसलमानों का सहयोग प्राप्त करने और उनके बीच अपनी लोकप्रियता में वृद्धि करने के लिए महमूद ने अपने भारतीय अभियानों को धार्मिक औचित्य प्रदान करना चाहा। हबीब के मतानुसार महमूद के आक्रमणों को धर्म-युद्ध करना भूल होगी। इन अभियानों के पीछे केवल धन पशप्ति था। महमूद द्वारा मंदिरों को लूटा गया, मूर्तियों को तोड़ा गया तो केवल इसलिए की ये धन और आभूषणों से भरे थे। देवताओं को प्रस्तुत चढ़ावे के रूप में सोना चाँदी और बहुमूल्य रत्नों का भण्डार मन्दिरों में इकट्ठा था और इनकी पशप्ति महमूद के लिए आवश्यक थी क्योंकि इनके बिना का लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता था ।

मोहम्मद हबीब ने यह सही लिखा है कि इस्लामी कानून में कोई सिद्धांत नहीं है जो महमूद के द्वारा विनाश एवं विध्वंस के कार्य को उचित ठहराये, मगर धर्मान्ध मुसलमानों ने ऐसा ही किया। महमूद एक चालाक राजनीतिज्ञ था और उसने समकालीन धर्मान्धता का पूरा लाभ उठाया। यह स्मरणीय रहे कि महमूद द्वारा मंदिरों का विनाश केवल युद्ध के बाल में हुआ और शांति की परिस्थितियों में उसने मंदिरों को क्षति नहीं पहुंचायी। इतना ही नहीं उसने अपने हिन्दू सैनिकों को गजनी के नगर में पूजा-पाठ की अनुमति भी दी।

निष्कर्ष में यह कहा जा सकता है कि महमूद के आक्रमणों को मौलिक कारण धन पशप्ति का लक्ष्य था वह भारत की धन-सम्पदा के बारे में जानता था और भारतीय शासकों की कमजोरियों से की परिचित था। अतः धन पशप्ति के लिए उसने अनेक बार भारत पर आक्रमण किए और अपना लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त किया।

हर्षवर्धन राज्यकाल का इतिहास के साहित्यिक साक्ष्यों का उल्लेख कीजिए।

मुहम्मद गोरी के आक्रमण के कारण–

महमूद गजनवी के आक्रमण के लगभग 150 वर्षो बाद भारत पर मुहम्मद गोरी ने आक्रमण किया। यह भी मध्य एशिया के गोर का निवासी तुर्क था। भारत पर मुहम्मद गोरी के आक्रमण के कारण निम्न थे

  1. मुहम्मद गोरी की महत्वाकांक्षा भारत में अपना साम्राज्य स्थापित करने की थी, उसने अतः राजनीतिक प्रभुसत्ता हेतु भारत पर निरंतर धावे किये थे।
  2. गजनवी तथा गोर-वंश में वंशानुगत शत्रुता ने मुहम्मद गोरी को गजनवी वंश की पंजाब में प्रभुसत्ता को नष्ट कर देने के लिये उत्साहित किया था, गजनी की विजय ने उसे पंजाब से भी गजनवी शक्ति का अन्तकर देने के लिये प्रेरित कर दिया था अब वह पंजाब को अपना स्वाभाविक अधिकृत प्रदेश मानने लगा था। पंजाब को जीतने से उसके वंश काएक शत्रु नष्ट होता था और पूर्व की ओर से राज्य की सुरक्षा सम्भव होती थी, अतः भारत में पंजाब को विजय कर लेने से उसे यवेष्ठ राजनीतिक लाभ दृष्टिगत हो रहे थे, इन समस्त कारणों ने उसे भारत पर आक्रमण करने का प्रोत्साहन दिया था।
  3. पश्चिम में गोर-वंश के राजनीतिक प्रसार में ख्वारिज्म शासक गतिरोध उत्पन्ना कर रहे थे, अतः उसने पूर्व की ओर अर्थात् भारत में राज्य विस्तार का निश्चय किया, इसलिये भारत पर आक्रमण करने प्रारम्भ किये।
  4. मुहम्मद गोरी की भारतीय धन-सम्पदा की चाह ने तथा इस्लाम के प्रसार की आकांक्षा ने भी उसे भारत पर आक्रमण करने के लिये प्रेरित किया था, तत्कालीन परिस्थितियों में यह स्वाभाविक भी था।

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