गबन का संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए।

गबन‘ उपन्यास सम्राट प्रेमचंद का महत्वाकांक्षी उपन्यास है। इस उपन्यास के माध्यम से प्रेमचंद ने बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों के भारत के मध्यमवर्गीय परिवारों का चित्र अंकित किया है। यह वह समय था, जब भारत पर अंग्रेजों का आधिपत्य था और कुछ उत्साही वीर युवक अपने-अपने ढंग से स्वतंत्रता प्राप्त करने का प्रयत्न कर रहे थे। इसी के समानांतर समाज के अधिकांश व्यक्ति प्रदर्शन-प्रियता और आभूषण-प्रेम की भावना से ग्रस्त थे। अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने के कारण अथवा उधारी में आभूषण जैसी वस्तुएँ क्रय करने के कारण एक ओर दयानाथ जैसे व्यक्ति को अपनी बहू के गहने चुराने जैसी स्थिति से गुजरना पड़ता है तो दूसरी ओर रमानाथ जैसे व्यक्ति को गबन करने के लिए बाध्य होना पड़ता है। तत्कालीन पुलिस-तंत्र के षडयंत्र और मिथ्या मुकदमे अंग्रेजों की ओछी मानसिकता को प्रदर्शित करते हैं। इस उपन्यास में नारी जागरण की भावना को जालपा के माध्यम से बहुत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

गबन उपन्यास के कथानक का उल्लेख कीजिए।

गबन उपन्यास में रतन नामक पात्र की चारित्रिक विशेषता।

औपन्यासिक-कला की दृष्टि से ‘गबन’ एक सफल उपन्यास है, जिसमें पात्र संयोजना और देश, काल और परिस्थिति की दृष्टि से कथावस्तु की संयोजना बहुत सफल बन पड़ी है। भाषा और शैली की दृष्टि से प्रेमचंद ने इसमें अनेक अविस्मरणीय प्रयोग किए हैं। यह एक उद्देश्यपूर्ण उपन्यास है। हिन्दी के उपन्यास साहित्य में ‘गबन’ का स्थान निर्विवाद रूप से महत्वपूर्ण है।

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