क्या प्रतिस्पर्धा जन्मजात प्रवृत्ति है ?

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प्रतिस्पर्धा की प्रवृत्ति जन्मजात होती है। कुछ विद्वानों के अनुसार अस्तित्व के लिए सर्वत्र प्रतिस्पर्धा हो रही है। जीवन के संघर्ष में प्रत्येक व्यक्ति यह प्रयत्न कर रहा है कि दूसरों की तुलना में उसकी विजय अधिक स्पष्ट तथा शीघ्र हो जीवन के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए केवल व्यक्ति और व्यक्ति में ही नहीं, व्यक्ति और अन्य प्राणियों के बीच भी प्रतिस्पर्धा चलती है। वास्तव में इन तथ्यों से यह सिद्ध नहीं होता कि प्रतिस्पर्धा जन्मजात होती है; क्योंकि यह प्रवृत्ति जन्मजात होती तो यह एक जाति के सभी सदस्यों में समान रूप से पाई जानी चाहिए थी।

परन्तु प्रतिस्पर्धा का रूप या स्वरूप विभिन्न व्यक्तियों तथा समूहों में अलग-अलग होता है। इसके अतिरिक्त, जिस समाज में जिस की पूर्ति सीमित होती है, उसी के लिए लोग प्रतिस्पर्धा करते हैं। इससे भी यह पता चलता है कि सामाजिक परिस्थिति, न कि मूल प्रवृत्ति, प्रतिस्पर्धामूलक व्यवहार के लिए उत्तरदायी होती है।

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