एक विषय के रूप में समाजशास्त्र की उत्पत्ति पर प्रकाश डालिए।

समाजशास्त्र की उत्पत्ति

एक विषय के रूप में समाजशास्त्र की उत्पत्ति – समाजशास्त्र शब्द के सर्वप्रथम प्रयोग का श्रेय कॉम्टे (1789-1857) को है। कॉम्टे अपने समय की प्रचलित दार्शनिक तथा आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सामाजिक घटनाओं की अध्ययन प्रणाली से संतुष्ट नहीं थे। इसलिए आप एक ऐसे नये विज्ञान का सृजन करना चाहते थे जो कि उस समय प्रचलित आध्यात्मिक तथा दार्शनिक विचारों से पूर्णतया विमुक्त हो और जो सामाजिक घटनाओं का अध्ययन वैज्ञानिक ढंग से करे। आपका विश्वास था कि सामाजिक घटनाओं का अध्ययन एक विशेष अध्ययन क्षेत्र है जो कि व्यक्ति के सामूहिक जीवन की अभिव्यक्ति होती है। जिस प्रकार प्राणिशास्त्र के अन्तर्गत समस्त व्यक्तिगत या समाज सम्बन्धी विषय तथा उससे सम्बन्धित नियमों का अध्ययन सम्मिलित है, उसी प्रकार सामूहिक जीवन और उससे सम्बन्धित आधारभूत नियमों के अध्ययन के लिए पृथक् विज्ञान की आवश्यकता है। कॉम्टे ने इस विज्ञान को पहले ‘सामाजिक भौतिकी’ की संज्ञा दी और फिर इसको बदलकर सन् 1838 में अपने नवीन विज्ञान का नाम ‘समाजशास्त्र‘ रखा और इस प्रकार आपने स्वयं को ‘समाजशास्त्र का पिता’ नाम से विभूषित करवाया। इसी विज्ञान को आगे चलकर जॉन स्टुअर्ट मिल ने 1843 में इंग्लैण्ड में परिचित कराया।

भारत में समाजशास्त्र के उद्भव एवं विकास का वर्णन कीजिए।

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