उपभोग प्रवृत्ति या उपभोग क्रिया क्या है? पूरी जानकारी

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उपभोग प्रवृत्ति या उपभोग क्रिया (Propensity to Consume or Consumption ) – उपभोग प्रवृत्ति या उपभोग क्रिया प्रभावपूर्ण माँग एवं रोजगार के आवश्यक निर्धारक तत्व है। यह उस आय की ओर संकेत करता है जो उपभोग पर व्यय किया जाता है। अर्थात् प्रवृत्ति कुल आय और कुल उपभोग के सम्बन्ध को प्रकट करती है। इस प्रकार यदि अर्थव्यवस्था में आय में वृद्धि होती है तो उपभोग की प्रवृत्ति भी बढ़ती है और यदि आय में कमी होती है तो उपभोग प्रवृत्ति भी कम हो जाती है।

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जिस बिन्दु पर आय एवं उपभोग दोनों बराबर होते हैं उसे अन्तराल शून्य बिन्दु कहते हैं। प्रायः आय बढ़ने के साथ-साथ आय और उपभोग का अन्तर भी बढ़ता जाता है। इसे निम्नलिखित रेखाचित्र के द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है।

उपभोग प्रवृत्ति या उपभोग क्रिया

उपभोग प्रवृत्ति या उपभोग क्रिया (Propensity to Consume or Consumption )
उपभोग प्रवृत्ति या उपभोग क्रिया (Propensity to Consume or Consumption )

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प्रस्तुत चित्र से यह स्पष्ट होता है कि यदि समाज की कुल आय का उपभोग कर लिय जाये तो आय एवं उपभोग-वक्र POरेखा 45° के समान उठती हुई होगी परन्तु ec उपभोग प्रवृत्ति रेखा यह स्पष्ट करती है कि आय में वृद्धि होने के बाद लोग कितना उपभोग करते हैं। यदि cc रेखा काल्पनिक आय एवं उपभोग वक्र PQ रेखा के नीचे ही रहती परन्तु बढ़ती हुई स्थिति को दर्शाती है। जो यह प्रकट करती है कि आय में वृद्धि के साथ-साथ उपभोग में वृद्धि होती है, परन्तु आय के अनुपात में नहीं। अतः आय एवं उपभोग के इस अन्तर को विनियोग (Investment) के द्वारा पूरा करना चाहिए। अन्यथा आय के स्तर को बनाये रखना असम्भव नहीं हो सकता हैं। चित्र में बिन्दु अन्तराल शून्य बिन्दु है अर्थात् यहाँ पर आय एवं उपभोग दोनों बराबर हैं, परन्तु जिस अनुपात में आय में में वृद्धि होती है उस अनुपात में उपभोग न होने के कारण E बिन्दु के दाहिने तरफ के अन्तर को विनियोग के द्वारा पूरा करना आवश्यक होता है जिससे पूर्व आय के स्तर को बनाये रखा जा सके।

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