उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अन्तर्गत जिला मंच की याक्तियाँ क्या हैं?

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उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्तर्गत जिला मंच की शक्तियाँ निम्न प्रकार हैं

(1) गवाहों को बुलाने का अधिकार

जिला मंच किसी भी प्रतिबादी (defendant) अथवा गवाह को शिकायत निवारण प्रक्रिया के अन्तर्गत कभी भी बुलाने का अधिकार रखता है। इसी प्रकार किसी भी साक्ष्य का परीक्षण करने के लिए किसी भी गवाह को हाजिर होने का आदेश दे सकता है।

(2) साक्ष्य को खोजने एवं प्रस्तुत करने की शक्ति

यदि शिकायत निवारण के लिए किसी साक्ष्य धारण करने वाले व्यक्ति की आवश्यकता पड़े तो जिला मंच उसे ‘बुलावा पत्र’ (Sommon) भेजकर बुलवा सकता है और ‘साक्ष्यों (Evidence) को प्रस्तुत कराने का आदेश प्रदान कर सकता है।

(3) जाँच रिपोर्ट प्राप्त करने की शक्ति

राज्य में गठित किसी भी जिला मंच को सरकार द्वारा निर्धारित प्रयोगशाला से शिकायत से सम्बन्धित माल की रिपोर्ट को माँगने (प्राप्त (करने) का अधिकार प्राप्त है। दण्ड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 193 तथा 228 के अन्तर्गत ‘न्यायिक क्रियाविधि’ (Judicial Proceedings) माना जाएगा। ऐसी परिस्थिति में जबकि कोई पक्ष झूठी गवाही प्रस्तुत करेगा तो भारतीय दण्ड (विधान) संहिता के अन्तर्गत, ‘अपराध’ मानते हुए उसके विरुद्ध कार्यवाही की जा सकेगी।

(6) प्रलेखों / प्रपत्रों या पुस्तकों को माँगने का अधिकार

यदि जिला मंच उचित समझता है तो वह इस अधिनियम के किसी भी उद्देश्य को पूरा करने के लिए सम्बन्धित पुस्तकों, लेखों, प्रलेखों एवं दस्तावेजों की मांग कर सकता है अथवा किसी भी व्यक्ति को इन्हें प्रस्तुत करने के लिए पूरा करने के लिए सम्बन्धित पुस्तकों, लेखों, प्रलेखों एवं दस्तावेजों की माँग कर सकता है अथवा किसी भी व्यक्ति को इन्हें प्रस्तुत करने के लिए आदेश प्रदान कर सकता है। जिला मंच को यह भी अधिकार है कि –

दलित से आप क्या समझते हैं?

  1. वह धारा 10 (2) (a) के अन्तर्गत उन पुस्तकों, कागजों, प्रलेखों या वस्तुओं को खोजने अथवा जब्त करने का आदेश प्रदान कर सकता है जिन्हें कि नष्ट किया जा रहा है अथवा परिवर्तित/विकृत किया जा रहा है।
  2. यदि मंच आवश्यक समझे तो जब्त किए गए प्रलेखों, कागजों, खातों या वस्तुओं का परीक्षण के पश्चात् रोकने या उन्हें वापस लौटाने का आदेश प्रदान कर सकता है।

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