आयोग ने धार्मिक शिक्षा के सम्बन्ध में क्या विचार प्रस्तुत किये हैं?

आयोग ने धार्मिक शिक्षा के सम्बन्ध

विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के अध्यक्ष डॉ राधाकृष्णन का विचार था “यदि हम इसी प्रकार केवल व्यावसायिक एवं औद्योगिक शिक्षा पर बल देकर ‘आत्मा’ का हनन करते गये तो अपने समाज में आसुरिक हलचल के द्वारा केवल राक्षस राज्य लाने में समर्थ हो सकेंगे।” अतः आयोग ने धार्मिक शिक्षा की आवश्यकता का अनुभव करते हुए उसके स्वरूप के सम्बन्ध में निम्न मुझाव दिये हैं

  1. प्रत्येक शिक्षण संस्थाओं में शिक्षण कार्य के प्रारम्भ होने के पूर्व शिक्षक एवं मिनट का मौन चिन्तन करें।
  2. डिग्री कोर्स के प्रथम वर्ष में देश के प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक नेताओं की जीवनियाँ पढ़ाई जायें।
  3. द्वितीय वर्ष में धार्मिक पुस्तकों के अंश पढ़ायें जायें। आयोग
  4. तृतीय वर्ष में दर्शन की प्रमुख समस्याओं का अध्ययन कराया जाए।

ई-लर्निंग की प्रारम्भिक भूमिका को स्पष्ट कीजिये।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top