अस्पृश्यता क्या है?

अस्पृश्यता का अर्थ है-जो छूने योग्य न हो। अस्पृश्यता ऐसी धारणा है जिससे एक व्यक्ति दूसरे को देखने व छूने मात्र से अपवित्र माना जाता है। उच्च जाति के हिन्दुओं ने स्वयं को अपवित्र होने से बचाने के लिए अस्पृश्य लोगों के रहने के लिये अलग से व्यवस्था की, उन पर अनेक निर्योग्यतायें लाद दी और उनके सम्पर्क से बचने के कई उपाय किये। अस्पृश्यता के अन्तर्गत वे जातीय समूह आते हैं जिनके छूने से अन्य व्यक्ति अपवित्र हो जायें और जिन्हें पुनः पवित्र होने के लिये कुछ विशेष संस्कार करने पड़े। इस सम्बन्ध में डॉ. के. एन. शर्मा ने लिखा है, “अस्पृश्य जातियां वे हैं जिनके स्पर्श से एक व्यक्ति अपवित्र हो जाये और उसे पवित्र होने के लिये कुछ कृत्य करने पड़ें।

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डॉ. मजूमदार के अनुसार, “वे सभी समूह जो अनेक सामाजिक एवं राजनैतिक निर्योग्यताओं से पीड़ित हैं तथा जिनके प्रति इन निर्योग्यताओं को समाज की उच्च जातियों ने परम्परागत तौर पर लागू किया था अस्पृश्यता जातियां कही जा सकती हैं।

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